बस्तर में कोरोना के साथ ही मलेरिया की चुनौती, मलेरिया मुक्त बस्तर अभियान का दूसरा चरण

रायपुर. मानसून की दस्तक के बीच मलेरिया मुक्त बस्तर अभियान का दूसरा चरण शुरू हो गया है। स्वास्थ्य विभाग ने बारिश के दिनों में मलेरिया संक्रमण की ज्यादा संभावना को देखते हुए जांच और पाजिटिव पाए गए लोगों को 31 जुलाई तक दवाई खिलाना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। सर्वे दल में शामिल कर्मचारियों को कोविड-19 से बचाव के लिए सभी सावधानियों और दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए अभियान संचालित करने कहा गया है।

अभियान के तहत स्वास्थ्य विभाग की टीम घने जंगलों और पहाड़ों से घिरे बस्तर के पहुंचविहीन, दुर्गम एवं दूरस्थ इलाकों में घर-घर पहुंचकर प्रत्येक व्यक्ति की मलेरिया जांच कर रही है। मलेरिया पॉजिटिव पाए जाने पर लोगों का तत्काल इलाज भी शुरू किया जा रहा है।

पूर्ण इलाज सुनिश्चित करने के लिए स्वास्थ्य कार्यकर्ता मलेरिया पॉजिटिव पाए गए लोगों को पहली खुराक अपने सामने ही खिला रहे हैं। स्थानीय मितानिन पीड़ितों के फॉलो-अप खुराक सेवन की निगरानी कर रही हैं। पीड़ितों द्वारा दवा की पूर्ण खुराक लिए जाने के बाद खाली रैपर (Empty Blister Pack) भी संग्रहित किए जा रहे हैं।

मलेरिया मुक्त बस्तर अभियान के दूसरे चरण में अब तक दो लाख 93 हजार लोगों की जांच की जा चुकी है। इस दौरान मलेरिया पॉजिटिव पाए गए 9005 लोगों का मौके पर ही इलाज शुरू कर दवाईयां दी गई हैं। इनमें से करीब 60 प्रतिशत ऐसे मामले हैं जिनमें पीड़ितों को मलेरिया के कोई लक्षण दिखाई नहीं दे रहे थे। अलाक्षणिक मलेरिया अनीमिया और कुपोषण का कारण बनता हैं।

मलेरिया मुक्त बस्तर अभियान के पहले चरण में भी मलेरिया के 57 प्रतिशत मामले बिना लक्षण वाले थे। यह सघन अभियान बस्तर में मलेरिया के साथ ही अनीमिया और कुपोषण दूर करने के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है।

स्वास्थ्य विभाग द्वारा गठित स्वास्थ्य कार्यकर्ता, मितानिन एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की टीम अब तक बस्तर संभाग के सभी सात जिलों के 63 हजार 490 घरों में जाकर मलेरिया की जांच कर चुकी है। जांच किए गए लोगों और घरों की पहचान के लिए मार्किंग भी की जा रही है।

टीम द्वारा मेडिकेटेड मच्छरदानी बांटने, गर्भवती महिलाओं और बच्चों को टीके लगाने के साथ ही दूसरी शारीरिक तकलीफों से जूझ रहे लोगों को निःशुल्क दवाईयां भी दी जा रही है। मलेरिया की जांच और इलाज, कीटनाशक के छिड़काव तथा इससे बचाव के तरीके बताने के साथ-साथ ग्रामीणों की मदद से मच्छर पैदा करने वाले स्रोतों को नष्ट भी करवाया जा रहा है।

मितानिनें रोज शाम सात बजे सीटी, घंटी या नगाड़ा बजाकर लोगों को मच्छरदानी लगाकर सोने के लिए प्रेरित कर रही हैं। मलेरिया जांच के लिए घर-घर जाने के दौरान भी वे लोगों को मच्छरदानी के उपयोग के लिए जागरूक कर रही हैं।

स्वास्थ्य विभाग ने अभियान के दौरान कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव हेतु सर्वे दलों के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। उन्हें मास्क पहनने, साबुन से बार-बार हाथ धोने, सेनिटाइजर का उपयोग करने और यथासंभव दस्ताने पहनने कहा गया है। किसी भी तरह की भीड़ की संभावना से बचने उन्हें घर-घर जाकर ही जांच करने कहा गया है।

मलेरिया जांच के लिए गांव पहुंच रहे दल ग्रामीणों को कोरोना वायरस संक्रमण से बचाव के तरीके भी बता रहे हैं। एक-दूसरे से पर्याप्त शारीरिक दूरी बनाए रखने, मास्क या साफ कपड़े से मुंह ढंकने, बार-बार हाथ धोने, साफ-सफाई रखने के बारे में जागरूक करने के साथ ही वे सर्दी, खांसी या बुखार होने पर सरपंच, सचिव, मितानिन या स्वास्थ्य कार्यकर्ता को बताने की समझाईश दे रहे हैं। मलेरिया जांच के दौरान अभी तक किसी भी व्यक्ति में कोविड-19 का लक्षण नहीं पाया गया है।

मलेरिया मुक्त बस्तर अभियान का पहला चरण इस साल 15 जनवरी से 14 फरवरी तक चलाया गया था। उस दौरान नगरीय क्षेत्रों के साथ ही दूरस्थ अंचलों और मजरों-टोलों में घरों, स्कूलों और अर्धसैनिक बलों के कैंपों में जाकर मलेरिया की सघन जांच की गई थी। लोगों को मलेरिया के प्रति जागरूक और सतर्क करने मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल और स्वास्थ्य मंत्री श्री टी.एस. सिंहदेव की अपील पर इसे जन अभियान के रूप में विस्तारित किया गया था।

मलेरिया मुक्त बस्तर अभियान के पहले चरण में 14 लाख छह हजार लोगों की जांच की गई थी। इस दौरान मलेरिया पॉजिटिव पाए गए 64 हजार 646 लोगों का मौके पर ही इलाज कर दवाईयां दी गई थीं। स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की निगरानी में उन्हें दवाईयों की पूरी खुराक का सेवन करवाया गया था।

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