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पहली बार राजधानी से ढाई सौ किलोमीटर दूर केबिनेट की होगी बैठक

सतरेंगा-बुका बनेगा आधुनिकतम पर्यटन सुविधाओं का महत्वपूर्ण राष्ट्रीय केन्द्र
राज्य सरकार द्वारा सतरेंगा में जल पर्यटन को विकसित करने की महत्वपूर्ण पहल

रायपुर.  राज्य सरकार की विशेष पहल से प्रदेश में पहली बार हसदेव बांगों जलाशय के लिए पर्यटन की असीम संभावनाओं के मद्देनजर योजनाबद्ध ढंग से विस्तृत कार्ययोजना बनाई जा रही है। इस तारतम्य में 29 फरवरी को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अध्यक्षता में मंत्रिपरिषद की बैठक हसदेव बांगों जलाशय के सतरेंगा में आयोजित की जा रही है। यह बैठक स्वयं में इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि यह राजधानी से लगभग 250 किलोमीटर की दूरी पर प्रथम बार कोरबा जिले स्थित सतरेंगा के प्राकृतिक और मनोरम जल सौंदर्य के मध्य फ्लोटिंग केबिनेट हॉल में आयोजित होगी।

राज्य सरकार द्वारा केबिनेट की ली जा रही यह बैठक सतरेंगा में जल पर्यटन को विकसित किए जाने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल और विशिष्ट सोच है, जिसमें माईस टूरिज्म की अवधारणा प्रमुख है। साधारण शब्दों में माईस टूरिज्म एक ऐसा पर्यटन का स्वरूप है, जिसमें व्यक्ति, समूह अथवा व्यावसायिक तथा विभिन्न कंपनियों अपने कार्यों के साथ-साथ उस क्षेत्र के पर्यटन स्थलों के आनंद की अनुभूति कर सकते हैं। माईस टूरिज्म लोगों की कार्य क्षमता बढ़ाने का नवीनतम साधन है।

राज्य सरकार की पर्यटन विकास के लिए सकारात्मक सोच इससे भी साबित होता है, किसी अच्छे कार्य को शुभारंभ करने के लिए हाथ में जल लेते हुए ऑचमन कर शुरूवात की जाती है, क्योंकि जल को पवित्र तथा निर्मल माना गया है। इसी अनुक्रम में मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल तथा मंत्रिपरिषद के सभी सदस्यों सहित जल के ऊपर ही मंत्रिपरिषद की बैठक आयोजित की जा रही है। इसमें मंत्रिपरिषद द्वारा जो भी निर्णय लिए जाएंगे उसको पूरा करने में शासन कृत संकल्पित भी रहेंगे।

सतरेंगा में जल पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए विशेषज्ञों की सलाह से विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर इसे राज्य का अग्रणी तथा खूबसूरत पर्यटन स्थल बनाए जाने की योजना है। राज्य शासन द्वारा यहां भविष्य में फ्लोटिंग रेस्टोरेंट, क्रूज, हाऊस बोट, गोल्फ कोर्स, सभी तरह की साहसिक जल क्रीड़ा, फ्लोटिंग कॉटेजस आदि उपलब्ध कराए जाने की मंशा है। सतरेंगा के इस पर्यटन स्थान को बेहतरीन सड़क तथा वायुमार्ग से भी जोड़े जाने की कार्ययोजना बनाई जाएगी। इस पर्यटन परियोजना के विकास से सुदूर अंचल में स्थित सतरेंगा क्षेत्र के स्थानीय जनजातियों को प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष रूप से 500 लोंगों को रोजगार के नवीन अवसर भी उपलब्ध होंगे। इस तरह सतरेंगा-बुका क्षेत्र जल पर्यटन तथा प्राकृतिक जल सौंदर्य और साहसिक गतिविधियों के लिए राष्ट्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी महत्वपूर्ण पहचान बना सकेगा।

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