आरटीई की राशि में कटौती, निजी स्कूल संचालकों ने उठाई आपत्ति

बिना वजह पैसा कटने से स्कूल संचालक परेशान

रायपुर। कोरोना काल में प्रदेश के निजी स्कूल आर्थिक रुप से मजबूत हो सके, इसलिए स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारी संचालक के निर्देश आरटीई (RTE) राशि का भुगतान कर रहे है। स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने 1 नवंबर से आरटीई की राशि का भुगतान करने के लिए कहा था, लेकिन अकाउंट वेरीफिकेशन प्रक्रिया होने की वजह से भुगतान 1 माह विलंब से निजी स्कूल संचालकों को मिलना शुरू हुआ।

अब भुगतान मिलना शुरु हुआ, तो स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा की जा रही कटौती से निजी स्कूल के संचालक परेशान है। स्कूल शिक्षा विभाग के जिम्मेदार तय राशि से कटौती करके स्कूलों को भुगतान कर रहे है। विभागीय अधिकारियों के इस कारनामें पर निजी स्कूलों के संचालक लामबंद हो रहे है और उनकी शिकयत वरिष्ठ अधिकारियों से करने की तैयारी कर रहे है।

प्रदेश में 90 हजार स्कूल

प्रदेश के निजी स्कूलों को प्रतिनिधित्व करने वाली संस्था छत्तीसगढ प्रायवेट स्कूल एसोसिएशन के पदाधिकारियों की मानें तो प्रदेश में लगभग 90 हजार स्कूल है। इन स्कूलों (RTE) का लगभग 183 करोड़ रुपए का भुगतान स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियों को करना है। एसोसिएशन के जिम्मेदारों की मानें तो पहले विभाग ने वेरीफिकेशन में लेटलतीफी की और भुगातन रािश में कटौती करके परेशान कर रहा है। जल्द ही एसोसिएशन के पदाधिकारी उक्त मामलें की शिकायत सचिव से करेंगे, ताकि कटौती की राशि भी उनकी जारी हो सके।

पहले चरण का हो चुका भुगतान

स्कूल शिक्षा विभाग के जिम्मेदारों की मानें तो निजी स्कूलों की आरटीई राशि का भुगतान करने के लिए केंद्र सरकार से लगभग 100 करोड़ रुपए मिला था। 100 करोड़ रुपए में अनुपात के हिसाब से स्कूलों को पैसा जारी किया जा रहा है। स्कूल ज्यादा है, इसलिए चरणबद्ध तरीके से राशि का भुगतान किया जा रहा है। जिन स्कूलों का भुगतान अभी नहीं हुआ है, उनका भुगतान भी जल्द कर दिया जाएगा।

2018 से अटका है कई स्कूलों का भुगतान

छत्तीसगढ़ प्रायवेट स्कूल एसोसिएशन (RTE) के अध्यक्ष राजीव गुप्ता ने बताया, कि प्रदेश के कई स्कूल ऐसे है, जिनका 2018 से भुगतान अटका हुआ है। ऐसे स्कूलों का आरटीई का भुगतान करते वक्त कटौती किया जाना पूरी तरह से गलत है। कई स्कूल ऐसे है, जिनका कटौती के नाम पर लाखों रुपए विभागीय अधिकारियों ने काट दिया है। इस बात की जानकारी संचालक को भी नहीं दी गई और भुगतान कर दिया गया है। इसी पेंच को लेकर जल्द स्कूल शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा की जाएगी। विभागीय अधिकारियों ने मामलें मनमानी नहीं रोकी, तो मामलें की शिकायत सीएम भूपेश बघेल से करेंगे और इंसाफ मांगेगे।

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