आर्ट ऑफ़ लिविंग आयोजित कर रहा है 21 दिनों का ऑनलाइन मेडिटेशन कार्यक्रम

जब सारा विश्व एक अनदेखे वायरस से परेशान हो, ऐसे में केवल एक ही चीज़ है जो आपको इन परिस्थियों से ऊपर उठा सकती है और वो है आपकी मजबूत मनःशक्ति !

कहते हैं, अगर मन सशक्त हो तो वह एक कमज़ोर शरीर को भी संभाल सकता है लेकिन अगर मन कमज़ोर है तो बलशाली से बलशाली शरीर भी जवाब दे जाता है ! आज दुनिया भर के शक्तिशाली देश जहां कोरोनावायरस (Coronavirus) की वैक्सीन बनाने में जुटें हैं वहीं एक प्रभावशाली तरीका है जो आपको इस चुनौतीपूर्ण समय से बाहर निकलने में कारगर सिद्ध हो सकता है और वो तरीका है ध्यान !

हमने हजारों वर्षों से अपनी ध्यान करने एक परंपरा सहेजी है जो हर काल , हर देश में अद्भुत रूप से परिणामदायक सिद्ध हुई है !

आर्ट ऑफ़ लिविंग के जनक और विश्व के चहेते मानवतावादी अध्यात्मिक गुरु, गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर ने इस वैश्विक चुनौती में विश्व भर की 7 अरब आबादी को मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक रूप से सशक्त बनाने का बीड़ा उठाया है | इसी उद्देश्य के साथ आर्ट ऑफ़ लिविंग संस्था ने 1 सितम्बर से विश्व भर के लिए 21 दिन का एक भव्य ऑनलाइन मेडिटेशन चैलेंज शुरू किया है। जिसमें लोग 21 दिन, प्रतिदिन शाम 7:30 बजे गुरुदेव के साथ ध्यान सीख सकेंगे ! ये ध्यान सभी के लिए निशुल्क होगा !

1 सितम्बर से शुरू हो रहा ये ऑनलाइन मेडिटेशन चैलेंज अब तक का सबसे अनोखा चलेंज है जिसमें 14 वर्ष से अधिक आयु के सभी लोग भाग ले सकेंगे। यहां ये जानना बहुत दिलचस्प है कि इससे पहले न तो भारत में और न ही दुनिया में ऐसा कोई कार्यक्रम हुआ है।



गुरुदेव श्री श्री रविशंकर इस प्रकार की पहल से इससे पहले भी दुनिया भर को, कई मंच पर एक साथ ला चुके हैं और विश्वशांति को एक नया आयाम दे चुके हैं। उनकी विश्व स्वास्थ्य और विश्व शांति के प्रति संवेदनशीलता अनुकरणीय है ! और इस बार विशेष यह है कि सारी दुनिया एक साथ एक समय पर, एक “ऑनलाइन मंच” पर 21 दिनों तक ध्यान करने जा रही है !

समस्त विश्व एक परिवार है ये तो हमने सुना है पर इस तरह के चैलेन्ज ये सिद्ध करते हैं कि 7 अरब जनसंख्या का एक परिवार अगर कोई पार्टी करे या उत्सव में शामिल होना चाहे तो उसका भी बंदोबस्त कुछ इस तरह से हो सकता है !!

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