कचहरी परंपरा तोड़ी सरगुजा राजघराने ने, इस बार सादगी से मनाएगा त्योहार

आजादी पूर्व से चल रही थी परंपरा

अंबिकापुर। दशहरे में आयोजित होने वाली सरगुजा राज घराने (Sarguja Rajgharaana) की कचहरी परंपरा इस बार आयोजित नहीं की जाएगी। कोरोना संक्रमण की वजह से सरगुजा राघराने ने आजादी के पूर्व से चली आ रही परंपरा को तोडऩे का निर्णय लिया है। राजघराने के इस निर्णय से कुछ लोगों ने नाराजगी जताई है, तो कुछ सरगुजावासियों ने इस अच्छा निर्णय बताया है।

आपको बता दे, कि दशहरे के दिन सरगुजा (Sarguja Rajgharaana) महाराज को कुलदेवी, कुलदेवता एवं शस्त्र पूजन जैसी रीतियों को पूरा करने के बाद कचहरी लगानी होती है। इसमें अपनी क्षमता अनुसार लोग नजऱाना पेश करते हैं। सिंहदेव परिवार के मुखिया को इस दिन दूर-दराज़ से आए हुए लोग नजराना पेश करते हैं। यह जनहित के कार्यों में लगाया जाता है।

इस दौरान पैलेस (Sarguja Rajgharaana) में लोगों का हुजूम उमड़ पड़ता है। बीते सालों में यह देखा जाता था कि लोग अपने इष्ट देवों की पूजा के बाद सीधे पैलेस पहुंचते थे। यहां राज परिवार के वर्तमान मुखिया एवं छत्तीसगढ़ शासन के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव जनता से भेंट करते थे। वहीं जिला प्रशासन ने मंदिरों को भी आमजन के लिए खोले जाने पर रोक लगा दी है। कचहरी नहीं लगने से लोग सिंहदेव परिवार के मुखिया को नहीं देख पाएंगे। सिंघदेव परिवार से जुड़े लोगों की मानें तो परिवार के मुखिया टीएस लोगों से वर्चुअली मुलाकात कर सकते है।

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