छत्तीसगढ़ी भाषा को संविधान मे जोड़ा जाए: सांसद फूलो देवी –

संसद में शून्य काल के अन्तर्गत उठाया गया मुद्दा

रायपुर/नयी दिल्ली. फूलों देवी नेताम ने कहा कि, सदन में मैं सवा तीन करोड छत्तीसगढी लोगों की मांग को आपके समक्ष रखना चाहती हूँ। छत्तीसगढी भाषा (Chhattisgarhi Bhasha) का इतिहास बहुत गौरवशाली रहा है।

रामचरित मानस में भी छत्तीसगढ़ी के शब्द मिलते हैं जैसे बाल काण्ड में माखी, सोवत, जरहि, बिकार किष्किन्धाकाण्ड में पखवारा, लराई, बरसा सुन्दरकाण्ड में सोरह, आंगी, मुंदरी आदि छत्तीसगढ़ी शब्द हैं। इसके बाद हमारे लेखकों ने भी छत्तीसगढी भाषा में कविताऐं, नाटक, निबंध, शोध-ग्रंथ लिखकर इस भाषा को बढावा देने का प्रयास किया है। लेकिन छत्तीसगढी भाषा (Chhattisgarhi Bhasha) के विकास के लिए आवश्यक है कि इसे संविधान की आठवीं अनुसूची में जोडा जाए।

छत्तीसगढ विधानसभा में संकल्प बहुमत से पारित

28 अगस्त 2020 को छत्तीसगढ विधानसभा द्वारा छत्तीसगढी भाषा (Chhattisgarhi Bhasha) को केन्द्र की आठवीं अनुसूची में शामिल करने के लिए शासकीय संकल्प को बहुमत से पारित कर दिया है। हम छत्तीसगढी अस्मिता को बढा रहे हैं। छत्तीसगढ सरकार द्वारा काम-काज में छत्तीसगढी भाषा का उपयोग किया जा रहा है।

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