ड्रोन के जरिए हवाई छिड़काव, टिड्डियों को खात्मा

नई दिल्ली। ड्रोन के जरिए हवाई छिड़काव करके टिड्डियों को खात्मा करने वाला भारत दुनिया का पहला देश है। देश के टिड्डी नियंत्रण अभियान की तारीफ संयुक्त राष्ट्र की संस्था खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) ने की है। यह जानकारी मंगलवार को केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने दी। मंत्रालय ने बताया कि राजस्थान के बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर, नागौर और जोधपुर में पांच ड्रोन से छिड़काव शुरू करने के साथ अब तक कई चरणों में 12 ड्रोन तैनात किए गए हैं और इनसे उंचे पेड़ों पर टिड्डियों का नियंत्रण प्रभावी तरीके से करने का अनुभव संतोषप्रद रहा है।

मंत्रालय ने बताया कि विदेशों से उपकरण मंगाने के साथ-साथ कृषि, सहकारिता और किसान कल्याण विभाग ने इस चुनौती का सामना करने के लिए मेक-इन इंडिया पहल के तहत टिड्डी नियंत्रण के लिए देसी यंत्र ‘वीकल माउंटेड यूएलवी स्प्रेयर’ तैयार किया, जिसका परीक्षण राजस्थान के बीकानेर और अजमेर में सफल रहा है और व्यावसायिक रूप इसे लांच करने की स्वीकृति की आवश्यकता है। इस दिशा में यह एक बड़ी उपलब्धि है,जिससे टिड्डी नियंत्रण के लिए उपकरण आयात करने की जरूरत नहीं होगी।

सरकार ने इंग्लैंड की मेसर्स माइक्रॉन स्प्रेयर्स से 60 मशीने खरीदने का ऑर्डर फरवरी में ही दिया था, जिनमें से 15 मशीनें आ गई हैं और बाकी 45 मशीनें एक महीने के भीतर आने की उम्मीद है।

मंत्रालय के अनुसार, हरियाली के दुश्मन टिड्डी दल के चपेट में आए सात राज्यों के 84 जिलों के एक लाख हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्र में टिडिड्यों का नियंत्रण किया जा चुका है और इस समय राजस्थान, गुजरात और मध्यप्रदेश में टिड्डी नियंत्रण जोरों पर चल रहा है।

जानकारी के अनुसार, पाकिस्तान के रास्ते भारत में टिड्डियों के दो झुंडों के प्रवेश की रिपोर्ट के बाद नियंत्रण अभियान तेज हो गई है। बताया जाता है कि एक झुंड ने बीकानेर और दूसरा श्रीगंगानगर जिले में प्रवेश किया है।

मंत्रालय ने बताया कि राज्यों के कृषि विभागों, स्थानीय प्रशासन और सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) की मदद से नियंत्रण कार्य चल रहा है।

केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने बताया कि 21 जून 2020 तक राजस्थान, पंजाब, गुजरात, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश तथा छत्तीसगढ़ में 114,026 हेक्टेयर क्षेत्र में टिड्डी नियंत्रण किया गया है, जबकि गुजरात और मध्यप्रदेश में मुख्य रूप से टिड्डी नियंत्रण अभियान जोरों पर चल रहा है।

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