नई शिक्षा नीति से साकार होगा विवेकानंद का सपना : Nishank

नयी दिल्ली ।केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि पूर्व और पश्चिम के सर्वोत्तम तत्वों को भारतीय आध्यात्मिक ज्ञान के साथ समाहित कर अंतर्मन की खोज, एकाग्रता, ध्यान की संस्कृति के साथ पश्चिम जगत के विज्ञान और प्रौद्योगिकी का सामंजस्य सम्मिलित करने की स्वामी विवेकानंद का सपना नई शिक्षा नीति से साकार होगा।

डॉ निशंक ने रामकृष्ण मिशन विवेकानंद एजुकेशनल एंड रिसर्च इंस्टीट््यूट द्बारा आयोजित 'नई शिक्षा नीति 2०2० तथा स्वामी विवेकानंद के शिक्षा संबंधी विचार वेबिनार को संबोधित करते हुए कहा कि भारत में विश्वविद्यालयों के बारे में स्वामी विवेकानंद की धारणा थी कि यह एक शैक्षणिक केंद्र हैं, जो पूर्व और पश्चिम के सर्वोत्तम तत्वों को भारतीय आध्यात्मिक ज्ञान के साथ समाहित करते हैं और इस ज्ञान में अपने अंतर्मन की खोज, एकाग्रता, ध्यान की संस्कृति के साथ पश्चिम जगत के विज्ञान और प्रौद्योगिकी का सामंजस्य सम्मिलित है और उनके भारत को शैक्षणिक केंद्र बनाने का सपना नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति साकार करेगी।

केंद्रीय मंत्री ने स्वामी विवेकानंद को याद करते हुए कहा,''आचार्य देवो भव: की सोच वाले हमारे समाज में स्वामी जी के अलावा श्री अरविदो, रवींद्र नाथ टैगोर, महात्मा गांधी, डॉ राधाकृष्णन जैसे अनेक विचारकों ने शिक्षा के संबंध में अपनी एक परिकल्पना दी है और इन सभी परिकल्पनाओं का संगम नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति है।

डॉ निशंक ने कहा, ''आज से लगभग सवा सौ साल पहले जिस काम के लिए स्वामी जी भारत के लोगों को प्रेरित कर रहे थे, मुझे खुशी है कि नई शिक्षा नीति के माध्यम से हम उस कार्य को पूरा करने की दिशा में कदम बढ़ा चुके हैं। यह नीति इंडियन, इंटरनेशनल, इंपैक्टफुल, इंटरएक्टिव और इंक्लूसिविटी के तत्वों को एक साथ समाहित करती है।

उन्होनें कहा कि स्वामी विवेकानंद चाहते थे कि भारतीय युवा विदेशी नियंत्रण से मुक्त होकर, हमारे अपने ज्ञान की विभिन्न शाखाओं का अध्ययन करें तथा इसके साथ अंग्रेजी भाषा एवं पश्चिमी विज्ञान का भी अध्ययन करें। नई शिक्षा नीति उनके इस विचार को सम्मिलित करते हुए ज्ञान, विज्ञान और अनुसंधान के प्रत्येक क्षेत्र में आगे बढèने तथा पुन: विश्वगुरु के गौरव को प्राप्त करने के लिए तत्पर है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने तकनीकी शिक्षा पर बल दिया जिससे हमारे शिक्षित भारतीय युवा अपने उद्योग स्वयं खड़े कर सके और वे नौकरी चाहने वालों की बजाय नौकरी देने वाले बन सकें। नई शिक्षा नीति ने तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा, प्रोफेशनल और कौशल विकास उन्मुख शिक्षा पर बहुत जोर दिया है, ताकि हमारे शिक्षित युवा आत्मनिर्भर हो सकें।

उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति में स्टडी इन इंडिया, शिक्षा में तकनीकी का एकीकरण, इंटर्नशिप, वोकेशनल ट्रेनिग आधारित शिक्षा, भारतीय भाषाओँ में शिक्षा, क्षमता निर्माण, चरित्र निर्माण, राष्ट्र निर्माण, जैसे प्रावधानों के बारे में भी बताया और कहा कि इन सभी लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए हम सदैव स्वामी जी के सिद्धांतों का अनुसरण करेंगे और उनसे प्रेरणा लेते रहेंगे। उन्होनें वेबिनार से जुड़े सभी महानुभावों को विश्वास दिलाया कि हम तब तक नहीं रुकेंगे जब तक हमारी नीति के लक्ष्य, स्वामी जी के लक्ष्य पूरे नहीं हो जाते। इस कार्यक्रम में स्वामी सुविरानंद, स्वामी आत्मप्रियानंद, स्वामी सर्वोत्तमानंद, स्वामी कीर्तिप्रदानंद एवं रामकृष्ण मिशन विवेकानंद एजुकेशनल एंड रिसर्च इंस्टीट््यूट(डीम्ड विश्वविद्यालय) से संबंधित अन्य संत समुदाय, कर्मचारीगण, शिक्षकगण, अभिभावक और छात्र भी जुड़े।(एजेंसी)

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