प्रदेश के 9 हजार स्कूलों का 300 करोड़ रुपए भुगतान अटका |

स्कूल संचालक परेशान, लगा रहे विभाग के चक्कर

रायपुर। निम्न आय वर्ग पालकों के बच्चों को निजी स्कूलों में उत्कृष्ठ शिक्षा मिल सके, इसलिए स्कूल शिक्षा विभाग के जिम्मेदार हर वर्ष शिक्षा के अधिकार अधिनियम (RTE) के तहत हजारो छात्रों का प्रवेश कराते है। इन छात्रों की फीस, किताब और ड्रेस का भुगतान स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारी निजी स्कूलों को करते है।

नियमों के तहत निजी स्कूलों ने अधिकारियों के निदेज़्श पर निम्न आय वर्ग वाले पालकों के बच्चों को स्कूलों में प्रवेश तो दे दिया, लेकिन पिछले तीन वषोज़्ं से इन स्कूलों का लगभग 300 करोड़ रुपए विभाग के पास अटका हुआ है। कोरोना काल में स्कूलों के संचालक आरटीई (RTE) का भुगतान लेने के लिए विभागीय अधिकारी और मंत्री के चक्कर लगा रहे है, लेकिन अब तक इनका भुगतान नहीं हुआ है। प्रदेश में स्कूल संचालित करने वाले संचालकों का कहना है, कि कोरोना काल में यदि आरटीई का पैसा मिल जाए, तो उनके स्कूलों को संजीवनी मिल जाएगी और स्कूल में पठन पाठन हो सकेगा।

9 हजार स्कूल है प्रदेश में

स्कूलों का प्रतिनिधत्व करने वाले छत्तीसगढ़ प्रायवेट स्कूल एसोसिएशन के सचिव मोती जैन ने बताया, कि निजी स्कूलों का करोड़ो रुपए बकाया है। राजधानी रायपुर में 2018-19 का कुछ पैसा मिला है, शेष जिलों में स्थिति बद से बदलतर है। कारोना काल में छोटे स्कूल लगभग बंद होने की कगार पर आ गए है। इस समय यदि, आरटीई (RTE) के पैसा का भुगतान विभाग कर देगा, तो अपना कर्जा चुकाकर संचालक स्कूल चला सकेंगे। एसोसिएशन के सचिव ने बताया, कि हर बार आश्वासन मिला, लेकिन समस्या का समाधान स्कूल शिक्षा विभाग के जिम्मेदार नहीं कर रहे है।

फंड लेट मिलने की वजह से लेटलतीफी

स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियों की मानें तो आरटीई का पैसा केंद्र सरकार से मिलता है। केंद्र सरकार से पैसा लेट आने की वजह से स्कूलों का भुगतान करने में देरी होती है। वर्तमान में केंद्र सरकार से योजना का लगभग 100 करोड़ रुपए मिला है। इस बजट से अनुपातित राशि निकालकर स्कूलों का भुगतान किया जाएगा। प्रक्रिया चल रही है, जल्द स्कूलों का भुगतान शुरू हो जाएगा।

आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिलता

प्रदेश में स्कूलों का प्रतिनिधत्व करने वाली संस्था छत्तीसगढ़ प्रायवेट स्कूल एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव गुप्ता ने बताया, कि शिक्षा विभाग के निर्देशानुसार आरटीई के तहत छात्रों को प्रवेश प्रदेश के निजी स्कूलों में दिया गया है। छात्रों को प्रवेश देने के बाद भी स्कूलों को भुगतान समय पर नहीं मिल रहा है। कोरोना समय में छोटे स्कूलों के संचालक कर्जो में दब गए है। जिम्मेदारों से हर बार भुगतान करने की मांग की जाती है, लेकिन आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिलता है।

भुगातन करने की प्रक्रिया शुरू कर दी

मामलें में लोक शिक्षण संचालनालय के संचालक जितेंद्र शुक्ला ने कहा, कि निजी स्कूलों का आरटीई पैसा का भुगतान करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। केंद्र सरकार से आरटीई का पैसा आता है, जिसे आने में लेट हुआ और इस वजह से स्कूलों का भुगतान नहीं किया गया था। वर्तमान में कुछ पैसा योजना का आया है। स्कूलों के आवेदन के हिसाब से अनुपातित राशि निकालकर भुगतान किया जाएगा।

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