बिहार की सभी प्रमुख नदियां खतरे के निशान पर

नयी दिल्ली. बिहार की सभी प्रमुख नदियां उफान पर हैं और कई स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। बाढ़ से निपटने के लिए पटना के बिहटा की 9वीं वाहिनी एनडीआरएफ की 16 टीमों को राज्य के अलग-अलग जिलों में तैनात किया गया है। बाढ़ का पानी नए इलाकों में प्रवेश कर रहा है, जिससे लोगों की परेशानी बढ़ गई है।

निचले इलाकों में पानी पहुंचने के बाद लोग ऊंचे स्थानों पर शरण लिए हुए हैं। राज्य में बाढ़ से अब तक आठ जिलों की चार लाख से ज्यादा की आबादी प्रभावित हुई है। आपदा प्रबंधन विभाग राहत एवं बचाव कार्य में जुटा है।

बिहार जल संसाधन विभाग द्वारा बुधवार को जारी रिपोर्ट के अनुसार, बुधवार को बागमती नदी अपने रौद्र रूप में है। बागमती सीतामढ़ी के ढेंग, सोनाखान, डूबाधार, चंदौली तथा कटौंझा और मुजफ्फरपुर के बेनीबाद और दरभंगा के हायाघाट में खतरे के निशान के ऊपर बह रही है, जबकि बूढ़ी गंडक मुजफ्फरपुर के सिकंदरपुर, समस्तीपुर के रोसरा रेल पुल के पास खतरे के निशान से ऊपर बह रही है।

इधर, ललबकैया पूर्वी चंपारण में, जबकि कमला बलान जयनगर व झंझारपुर में तथा महानंदा पूर्णिया के ढेंगराघाट में खतरे के निशान के ऊपर बह रहीं हैं। कोसी का जलस्तर वीरपुर बैराज के पास बुधवार को सुबह छह बजे 2.38 लाख क्यूसेक था, जो आठ बजे 2़12 लाख क्यूसेक हो गया। गंडक नदी का जलस्राव बाल्मीकिनगर बैराज के पास सुबह आठ बजे 3.24 लाख क्यूसेक बना हुआ है। गंडक में जलस्तर में वृद्घि होने के बाद कई नए क्षेत्रों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है। गोपालगंज के चार प्रखंड बाढ़ की पानी से घिरे हुए हैं।

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