लक्ष्मी विलास बैंक का डीबीएस बैंक में विलय, कैबिनेट ने दी मंजूरी, 4 हजार कर्मचारियों को मिलेगी राहत

नई दिल्ली। 17 नवंबर को केंद्र सरकार ने लक्ष्मी विलास बैंक के कामकाज पर रोक लगा दी थी। इसके अलावा केंद्र सरकार ने इस बैंक से पैसे की निकासी पर भी लिमिट तय कर दी। जिसके अनुसार इस बैंक के ग्राहकों 25,000 रुपये से अधिक नहीं निकालने की छूट नहीं थी। अब केंद्रीय कैबिनेट ने इस बैंक को लेकर बड़ा कदम उठाते हुए इसे डीबीएस बैंक इंडिया लिमिटेड (DBS Bank India Limited)के साथ विलय (Amalgamation) के प्रस्‍ताव को मंजूरी दे दी है। इस विलय के साथ ही लक्ष्‍मी विलास बैंक के जमाकर्ताओं पर निकासी की कोई सीमा (withdrawal Limit) अब नहीं होगी। बुधवार को केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने यह जानकारी दी। उन्‍होंने बताया कि डीबीएस बैंक इंडिया लिमिटेड में लक्ष्‍मी विलास बैंक के विलय से इस बैंक के करीब 20 लाख जमाकर्ताओं और लगभग चार हजार कर्मचारियों को राहत मिलेगी। आपको बता दें कि लक्ष्‍मी विलास बैंक से जुड़े मामले का समाधान इसके जमाकर्ताओं और कर्मचारियों के वित्‍तीय हितों की रक्षा के साथ स्‍वच्‍छ बैंकिंग प्रणाली के लिए सरकार की मंशा को दर्शाता है।

जावडेकर ने जानकारी देते हुए बताया कि नेशनल इनवेस्‍टमेंट एंड इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर फंड में 6000 करोड़ रुपये के निवेश को मंजूरी इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर डेवलपमेंट के लिए कैबिनेट ने दी है। इसके साथ ही एटीसी टेलीकॉम कंपनी की करीब 12 प्रतिशत शेयर खरीदने के लिए मंत्रिमंडलीय समिति ने एटीसी एशिया पैसिफिक के 2,480 करोड़ रुपये के एफडीआई प्रस्ताव को को भी हरी झंडी दे दी है।

बता दें कि इससे पहले वित्‍त मंत्रालय (Ministry of Finance) ने बताया था कि लक्ष्मी विलास बैंक को 16 दिसंबर तक के लिए मोरेटोरियम (Moratorium) के तहत रखा गया है। ऐसे में ये प्रतिबंध इस तारीख तक जारी रहेगा। मतलब ये कि अब एक महीने तक बैंक ग्राहक अधिकतम 25,000 रुपये ही निकाल पाएंगे। हालांकि अब डीबीएस बैंक इंडिया लिमिटेड में इस बैंक के विलय के बाद ग्राहकों पर निकासी की कोई सीमा नहीं होगी।

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