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शिवराज सरकार को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस

नयी दिल्ली/एजेंसी. सुप्रीम कोर्ट ने तय संख्या से ज़्यादा मंत्री बनाए जाने पर शिवराज सिंह चौहान सरकार को नोटिस भेजा है। बता दें कि मध्य प्रदेश की शिवराज सरकार ने दो जुलाई को कैबिनेट विस्तार किया है। कैबिनेट विस्तार में 28 नेताओं को मंत्री पद की शपथ दिलाई गई थी। इसमें कैबिनेट और राज्यमंत्री शामिल हैं। मध्यप्रदेश में इस समय 33 मंत्री हैं।

बता दे कि मध्य प्रदेश विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष एनपी प्रजापति ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर शिवराज मंत्रिमंडल के विस्तार का मुद्दा उठाया है। याचिका में कहा गया है कि वर्तमान विधानसभा सदस्यों की संख्या के मुताबिक 34 मंत्री नहीं बनाए जा सकते, विधानसभा में जितनी सदस्य संख्या है उसके हिसाब से विधानसभा सदस्यों की 15 संख्या से ज्यादा मंत्री नहीं बनाए जा सकते। ये वैधानिक व्यवस्था हैए लेकिन शिवराज मंत्रिमंडल में तय संख्या से ज़्यादा मंत्री बनाए गए हैं। प्रजापति ने इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।

याचिकाकर्ता की ओर से सुप्रीम कोर्ट में पक्ष रखने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और विवेक तन्खा ने दलील दी कि प्रदेश में हुआ मंत्रिमंडल विस्तार संविधान के अनुच्छेद 164 (1ए) का स्पष्ट उल्लंघन है। आर्टिकल 32 के तहत दायर याचिका में मुद्दा उठाया गया है कि हाल ही में शिवराज सरकार ने 28 मंत्रियों की नियुक्ति की हैए जबकि पूर्व में पहले से ही पांच मंत्री नियुक्त किए गए थे। इस लिहाज से मध्य प्रदेश में मंत्रिमंडल में सदस्यों की कुल संख्या 33 हो गई है।

अगर नियम की बात की जाए तो धारा 164ए के तहत विधानसभा की कुल सदस्यों के 15 प्रतिशत सदस्य ही मंत्री बनाए जा सकते हैं। जिसका कुल आंकड़ा सिर्फ 30 मंत्रियों का होता है। बावजूद इसके चार मंत्री ज्यादा बना दिए गए हैं।

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