महान संस्कृति से भारत को विश्व में मिले पहचान: सुधा मूर्ति

नई दिल्ली। राज्यसभा सदस्य एवं पद्म भूषण सुधा मूर्ति ने कहा कि भारत का युवा अगर अपने देश के अतीत और इतिहास को नहीं जाने तो वह भविष्य को नहीं जान पाएगा। भारतीय इतिहास का दस्तावेजीकरण सही तरीके से नहीं किया गया, इसलिए बहुत सारे महत्वपूर्ण तथ्य आज हमारे सामने नहीं है। हम अपने इतिहास से बहुत कुछ सीखते हैं। भारत को सिर्फ बॉलीवुड और सॉफ्टवेयर के लिए न जाना जाए बल्कि इसकी महान संस्कृति के लिए पूरे विश्व में पहचान मिले, यह भी बहुत जरूरी है। 

सुधा मूर्ति ने शुक्रवार को हंसराज कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय में बोगनवेलिया आर्ट फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित बोधगया के विहार पुस्तक के विमोचन एवं परिचर्चा कार्यक्रम में बोल रही थीं। उन्होंने कहा कि बुद्ध एक ऐसे व्यक्ति थे, जिन्होंने शांति की स्थापना की। इस कॉफी टेबल बुक के माध्यम से बोधगया के विहारों का बड़ा सुंदर तरीके से प्रस्तुतीकरण किया गया है। 

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं भारतीय जनता पार्टी के महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष वानथी श्रीनिवासन ने कहा कि बोधगया के विहारों पर किया गया यह कार्य एक बहुत महत्वपूर्ण प्रयास है। उन्होंने इस कार्य में सहयोग देने के लिए मूर्ति ट्रस्ट की प्रशंसा की। 

उन्होंने कहा कि इस तरह की पुस्तकों से भारतीय संस्कृति को बड़े करीब से समझने का अवसर मिलता है। विशेष अतिथि पद्म श्री केके मोहम्मद ने कहा कि एक शानदार फोटोग्राफर होने के साथ-साथ लेखक होने पर भारतीय संस्कृति का और सुंदर तरीके से प्रस्तुतीकरण किया जा सकता है। यह पुस्तक इसकी बेहतरीन कला का उदाहरण है। उन्होंने कहा कि बोध गया के विहार काफी टेबल पुस्तक एक संग्रहणीय ग्रंथ है।

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