संविधान पिछले 75 सालों से आर्थिक बदलावों का सूत्रधार रहा : बिरला

नई दिल्ली। संविधान सदन के केंद्रीय कक्ष में लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने मंगलवार को कहा कि सभी सदस्यों को संसद के सदनों में सार्थक और सकारात्मक संवाद की उत्कृष्ट परंपरा को अपनाना चाहिए। संविधान सभा की गौरवशाली परम्पराओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि संविधान सभा में अलग अलग विचारधारा वाले सदस्य थे। इसके बावजूद उन्होंने एक-एक अनुच्छेद पर विचार मंथन किया तथा अपनी सहमति और असहमति को पूरी गरिमा और मर्यादा के साथ व्यक्त किया।

इस मौके पर भारत की राष्ट्रपति, द्रौपदी मुर्मू, भारत के उपराष्ट्रपति और राज्य सभा के सभापति जगदीप धनखड़, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय मंत्रियों और संसद सदस्यों ने भी 1949 में संविधान सभा द्वारा भारत के संविधान को अंगीकार किए जाने की 75वें वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित समारोह की शोभा बढ़ाई । इस वर्ष के संविधान दिवस का विषय था हमारा संविधान, हमारा स्वाभिमान। बिरला ने कहा कि संविधान पिछले 75 सालों से देश में सामाजिक-आर्थिक बदलावों का सूत्रधार रहा है और कर्तव्य काल में भारत सामूहिक प्रयासों और दृढ़ संकल्प के साथ विकसित भारत की ओर मजबूती से आगे बढ़ रहा है।

 बिरला ने संसद सदस्यों से आग्रह किया कि वे अपने निर्वाचन क्षेत्रों में संविधान के अंगीकार किए जाने की 75वीं वर्षगांठ को जनता की सहभागिता से एक उत्सव के रूप में मनाएँ जिससे राष्ट्र प्रथम की भावना और अधिक सुदृढ़ हो ।   बिरला ने कहा कि संविधान ने लोकतंत्र के तीनों स्तंभों- विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका को आपसी समन्वय के साथ सुचारु रूप से कार्य करने की व्यवस्था दी है।  

उन्होंने यह भी कहा कि इन 75 वर्षों में इन तीनों अंगों ने श्रेष्ठता से कार्य करते हुए देश के समग्र विकास में अपनी भूमिका निभाई है ।  बिरला ने कहा कि नए संसद भवन के निर्माण से देश की समृद्धि और क्षमता में एक नई गति और शक्ति का संचार हुआ है।  बिरला ने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि राष्ट्रपति की अगुवाई में पूरा देश एक साथ मिलकर पवित्र संविधान के प्रति कृतज्ञता व्यक्त कर रहा है।  

बिरला ने कहा कि लाखों भारतीयों द्वारा संविधान की प्रस्तावना का पाठ पढ़ा जाना और राष्ट्र को आगे ले जाने का संकल्प लेना इस  पवित्र दस्तावेज के प्रति सच्ची श्रद्धा है।  वर्ष 2015 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा हर वर्ष 26 नवंबर को संविधान दिवस के रूप में मनाए जाने के ऐतिहासिक निर्णय का उल्लेख करते हुए  बिरला ने कहा कि यह कदम वर्तमान पीढ़ी, विशेषकर युवाओं को संविधान में निहित मूल्यों, आदर्शों, कर्तव्यों और जिम्मेदारियों से जोड़ने के लिए उठाया गया था।  भारत के संविधान को अंगीकार किए जाने की 75वीं वर्षगांठ पर एक स्मारक सिक्का और डाक टिकट जारी किया गया। विशिष्ट जनों ने भारत के संविधान का निमार्ण: एक झलक और भारत के संविधान का निर्माण और इसकी गौरवशाली यात्रा शीर्षक से प्रकाशित दो पुस्तकों का विमोचन किया । इन प्रकाशनों के अलावा, भारत के संविधान की कला को समर्पित एक पुस्तिका भी जारी की गई।

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