छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले से एक बेहद चौंकाने वाला और गंभीर आपराधिक मामला सामने आया है। पुलिस और राजस्व प्रशासन की संयुक्त टीम ने जिले के समोदा ग्राम में मक्के की फसल की आड़ में चल रहे बड़े पैमाने पर ‘illegal opium cultivation’ (अवैध अफीम की खेती) का भंडाफोड़ किया है। इस बड़ी कार्रवाई ने पूरे प्रदेश में हड़कंप मचा दिया है, क्योंकि इसमें कुछ रसूखदार लोगों की संलिप्तता भी उजागर हुई है।
Durg में 8 करोड़ का illegal opium cultivation
दुर्ग कलेक्टर अभिजीत सिंह द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, समोदा, झेनझरी और सिरसा गांव के बीच स्थित खेतों में यह अवैध खेती की जा रही थी। मुखबिर की सटीक सूचना पर जब पुलिस और नारकोटिक्स (NCB) की टीम ने मौके पर दबिश दी, तो मक्का और भुट्टे की फसल के बीच बड़ी चालाकी से छिपाकर लगाए गए अफीम (Opium) के हजारों पौधे बरामद हुए। जांच में पाया गया कि यह ‘illegal opium cultivation’ लगभग 5 एकड़ के विशाल क्षेत्र में फैला हुआ था, जिसकी बाजार में अनुमानित कीमत करीब 8 करोड़ रुपये आंकी गई है।
रसूखदार समेत 3 गिरफ्तार, मास्टरमाइंड फरार
इस गंभीर मामले में दुर्ग पुलिस ने त्वरित और सख्त कार्रवाई करते हुए NDPS एक्ट के तहत तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार किए गए लोगों में कथित स्थानीय नेता विनायक ताम्रकार, गोलू ठाकुर और विकास विश्नोई शामिल हैं।
वहीं, इस पूरी अवैध खेती का मुख्य मास्टरमाइंड (Mastermind) राजस्थान के जोधपुर का रहने वाला अचला राम जाट बताया जा रहा है, जो फिलहाल पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। उसने यह खेत लीज (Lease) पर लेकर मजदूरों के जरिए खेती करवाई थी। पुलिस की एक विशेष टीम उसकी गिरफ्तारी के लिए जोधपुर रवाना हो चुकी है।
NDPS एक्ट के तहत गैर-जमानती अपराध
खेत में काम कर रहे मध्य प्रदेश के खंडवा जिले के कुछ मजदूरों से भी पुलिस पूछताछ कर रही है। प्रशासन ने अफीम की इस अवैध फसल को नष्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। आपको बता दें कि एनडीपीएस (NDPS) एक्ट की धारा 18 और 19 के तहत अफीम की खेती करना एक गैर-जमानती (Non-bailable) अपराध है, जिसमें 10 से 20 साल तक की कठोर सजा का कड़ा प्रावधान है।
