छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) विधानसभा के बजट सत्र में आज एक बेहद संवेदनशील और बड़े मुद्दे पर ज़बरदस्त गतिरोध देखने को मिला। ताज़ा CG Religious Freedom Bill (सीजी रिलिजियस फ्रीडम बिल) को लेकर सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच भारी हंगामा हुआ। इस तीखी नोकझोंक और हंगामे के बाद विपक्षी दलों ने सदन की कार्यवाही का पूरी तरह से बहिष्कार (Boycott) कर दिया। इस ताज़ा राजनीतिक घटनाक्रम ने प्रदेश की सियासत में एक नई और बड़ी बहस छेड़ दी है।
CG Religious Freedom Bill: विधेयक के प्रावधानों (Provisions) पर कड़ा ऐतराज़
सदन में जैसे ही इस नए धार्मिक स्वतंत्रता विधेयक को चर्चा के लिए पटल पर रखा गया, विपक्षी विधायकों ने इसके कई प्रावधानों पर सख़्त ऐतराज़ ज़ाहिर किया। विपक्ष का साफ़ आरोप है कि इस CG Religious Freedom Bill के ज़रिए सरकार एक विशेष एजेंडे को लागू करने की कोशिश कर रही है और यह नागरिकों के संवैधानिक और मौलिक अधिकारों (Fundamental Rights) का सीधा उल्लंघन है। विपक्षी सदस्यों ने इस बिल को तुरंत वापस लेने या इसे प्रवर समिति (Select Committee) के पास भेजने की ज़ोरदार मांग की।
सत्ता पक्ष (Ruling Party) का ज़ोरदार पलटवार
विपक्ष के इन गंभीर और तीखे हमलों के बीच सत्ता पक्ष के मंत्रियों और विधायकों ने भी ज़ोरदार पलटवार किया। सरकार की ओर से यह स्पष्ट किया गया कि यह विधेयक किसी भी धर्म के ख़िलाफ़ नहीं है, बल्कि इसका मुख्य उद्देश्य ज़बरन या लालच देकर कराए जाने वाले धर्मांतरण (Religious Conversion) को पूरी सख़्ती से रोकना है। सरकार का तर्क है कि प्रदेश की शांति और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने के लिए यह क़ानून वक़्त की सबसे बड़ी ज़रूरत है।
बहिष्कार (Boycott) से गरमाई प्रदेश की राजनीति
दोनों पक्षों के बीच लगातार बढ़ती इस ज़ुबानी जंग और हंगामे के बाद, जब विपक्ष की मांगें नहीं मानी गईं, तो उन्होंने एकजुट होकर सदन से वॉकआउट और कार्यवाही का बहिष्कार कर दिया। विधानसभा के इस ताज़ा गतिरोध ने यह साफ़ कर दिया है कि धार्मिक स्वतंत्रता के इस अहम् क़ानून पर सड़क से लेकर सदन तक आने वाले दिनों में और भी ज़्यादा तल्ख़ी देखने को मिलेगी।
