मध्य पूर्व (Middle East) में चल रहे भारी संघर्ष और तनाव के बीच भारत को एक बेहद बड़ी और अहम् कूटनीतिक सफलता मिली है। ताज़ा Indian Ship Strait of Hormuz (इंडियन शिप स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़) अपडेट के अनुसार, एक भारतीय एलपीजी (LPG) टैंकर को ईरानी नौसेना ने ख़ुद अपनी सुरक्षा में होर्मुज़ जलडमरूमध्य से सुरक्षित पार कराया है। यह घटना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की मज़बूत कूटनीति और वैश्विक कूटनीतिक धमक का एक साफ़ और शानदार उदाहरण है।
Indian Ship Strait of Hormuz: ईरानी नौसेना (Iranian Navy) का ख़ास सुरक्षा घेरा
अंतरराष्ट्रीय न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक़, भारत के कूटनीतिक प्रयासों के बाद ईरान ने इस भारतीय पोत को अपने पहले से तय रास्ते से गुज़रने की विशेष अनुमति दी थी। पोत पर सवार अधिकारियों ने बताया कि ईरानी नौसेना रेडियो के ज़रिए लगातार उनके संपर्क में थी। जहाज़ पर लगा तिरंगा, चालक दल की भारतीय राष्ट्रीयता और गंतव्य की पूरी जानकारी पक्की करने के बाद ही ईरानी नौसेना ने इस Indian Ship Strait of Hormuz से सुरक्षित निकासी की पूरी ज़िम्मेदारी संभाली।
कूटनीति (Diplomacy) और मध्यस्थता की मज़बूत संभावना
पूर्व राजनयिकों का मानना है कि ऐसे नाज़ुक वक़्त में जब 22 से ज़्यादा देश ईरान पर होर्मुज़ का रास्ता खोलने का भारी दबाव बना रहे हैं, तब भारत को मिली यह विशेष छूट बहुत मायने रखती है। जानकारों के अनुसार, ईरान इस नाज़ुक मोड़ पर भारत के साथ अपने रिश्ते ख़राब नहीं करना चाहता। इस बड़े फ़ैसले से यह भी संकेत मिलता है कि भविष्य में भारत इस पूरे युद्ध में एक अहम् मध्यस्थ की भूमिका निभा सकता है।
सुरक्षित वापसी और जीपीएस (GPS) की बाधाएं
यह पोत तक़रीबन 10 दिनों तक फ़ारस की खाड़ी में लंगर डाले हुए था। क्षेत्र में जीपीएस सिग्नलों में भारी बाधा होने के कारण जहाज़ को नेविगेट करने में सामान्य से काफ़ी ज़्यादा समय लगा। हालांकि, जलडमरूमध्य के दूसरी तरफ़ भारतीय नौसेना के युद्धपोत उनका बेसब्री से इंतज़ार कर रहे थे, जिससे चालक दल की सुरक्षित वापसी पूरी तरह सुनिश्चित हो सकी।
