छत्तीसगढ़ में करोड़पति गांव के वादे पर सियासत: Naxal Free Villages को 1 करोड़ मिलने पर उठे सवाल

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री और गृह मंत्री के साथ नक्सल मुक्त गांव के विकास का प्रतीकात्मक चित्रछत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री और गृह मंत्री के साथ नक्सल मुक्त गांव के विकास का प्रतीकात्मक चित्र

कौन बनेगा करोड़पति’ का जिक्र आते ही टीवी का मशहूर शो याद आ जाता है। हालांकि, छत्तीसगढ़ के बस्तर में अब यह किसी गेम शो का नहीं, बल्कि एक बड़ी राजनीतिक बहस का मुख्य केंद्र बन गया है। दरअसल, राज्य में Naxal Free Villages (नक्सल मुक्त गांवों) को 1 करोड़ रुपये देने के वादे पर अब विपक्ष ने सरकार को चारों तरफ से घेरना शुरू कर दिया है। परिणाम स्वरूप, राजनीतिक गलियारों में यह सवाल गूंज रहा है कि आखिर प्रदेश का पहला करोड़पति गांव कौन सा होगा।

Naxal Free Villages: अमित शाह का वादा और कांग्रेस के सवाल

बीते 6 अप्रैल 2025 को दंतेवाड़ा में आयोजित बस्तर पंडुम के समापन समारोह में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक बड़ा ऐलान किया था। उन्होंने स्पष्ट रूप से घोषणा की थी कि जो भी गांव नक्सलवाद से पूरी तरह मुक्त होगा, उसे विकास के लिए 1 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि दी जाएगी।

इसके अलावा, 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद को समाप्त करने की तय समय-सीमा भी अब बीत चुकी है। इसी बात को आधार बनाते हुए पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सीधे तौर पर पूछा है कि जब सार्वजनिक मंच से यह बड़ा वादा किया गया था, तो अब तक इसका कोई ब्लूप्रिंट या बजट क्यों नहीं तैयार किया गया?

वर्तमान स्थिति को स्पष्ट करने के लिए कांग्रेस ने कुछ अहम सवाल उठाए हैं:

  • अब तक कितनी पंचायतों को यह 1 करोड़ की राशि मिल चुकी है?
  • क्या मुख्यमंत्री ने अपनी हालिया दिल्ली यात्रा में प्रधानमंत्री से इन गांवों के लिए फंड मांगा?
  • इस योजना के तहत केंद्र को अब तक कितने प्रस्ताव भेजे गए हैं?

बस्तर विकास का नया रोडमैप बनाम ‘जुमला’

हाल ही में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने दिल्ली का दौरा कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से खास मुलाकात की थी। रायपुर लौटने के बाद मुख्यमंत्री ने दावा किया कि जवानों के अदम्य साहस और सरकार की इच्छाशक्ति से बस्तर में बदलाव आ रहा है। दरअसल, अब वहां पर्यटन, शिक्षा और रोजगार के जरिए लंबी अवधि के विकास मॉडल पर तेजी से काम किया जा रहा है।

हालांकि, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने इस दावे पर पलटवार करते हुए इसे महज एक ‘जुमला’ करार दिया है। बैज का कहना है कि सरकार खुद सुकमा, दंतेवाड़ा और नारायणपुर जैसे कई जिलों को नक्सल मुक्त घोषित कर रही है। ऐसे में इन क्षेत्रों की पंचायतों को उनके हक का 1 करोड़ रुपया कब मिलेगा, यह कोई स्पष्ट नहीं कर रहा।

भाजपा का कड़ा पलटवार: विकास देखकर बेचैन है विपक्ष

विपक्ष के इन तमाम आरोपों का भारतीय जनता पार्टी ने भी करारा जवाब दिया है। पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता गौरीशंकर श्रीवास ने कांग्रेस के बयानों को पूरी तरह से उनकी हताशा का परिणाम बताया है। उनके अनुसार, बस्तर अब अपनी पुरानी पहचान छोड़कर सड़क, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे जैसे विकास कार्यों की नई राह पर निकल पड़ा है।

निष्कर्ष के तौर पर, सुकमा के केरलापेंडा जैसे कई गांव नक्सल मुक्त होने की मिसाल बन चुके हैं। इसलिए, अब आम जनता की नजरें भी इसी बात पर टिकी हैं कि जमीनी स्तर पर विकास के लिए यह 1 करोड़ रुपये की भारी रकम आखिर कब जारी की जाएगी। फिलहाल, इस बड़े राजनीतिक वादे पर सियासत थमने का कोई नाम नहीं ले रही है।