Iran US War Update:पश्चिम एशिया (Middle East) में ईरान और अमेरिका के बीच लगातार गहराते युद्ध के संकट के बीच कूटनीतिक हलचल भी तेज हो गई है। ईरान ने अमेरिका के सामने 1 नया और बेहद अहम शांति प्रस्ताव रखा है। रिपोर्ट के मुताबिक, यह प्रस्ताव पाकिस्तान के जरिए व्हाइट हाउस तक पहुंचाया गया है। इस प्रस्ताव में ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिका के साथ किसी भी तरह की परमाणु वार्ता (Nuclear Talks) तभी संभव है, जब अमेरिका कुछ बुनियादी शर्तों को मान ले।
2 चरणों वाले नए प्रस्ताव में क्या है खास?
ईरान ने अपने इस नए शांति प्लान को 2 अलग-अलग चरणों में बांटा है।
- पहले चरण में ईरान ने मांग की है कि अमेरिका तुरंत स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) से अपनी नाकेबंदी हटाए। साथ ही, युद्धविराम लागू किया जाए या युद्ध को तुरंत खत्म करने का ऐलान हो।
- ईरान का कहना है कि जब तक यह नाकेबंदी नहीं हटती, तब तक कोई भी गंभीर बातचीत संभव नहीं है।
- इसके बाद ही दूसरे चरण की शुरुआत होगी, जिसमें हालात सामान्य होने पर परमाणु हथियारों के मुद्दे पर बातचीत की जाएगी।
- इसके अलावा ईरान ने सुरक्षा की गारंटी, युद्ध से हुए नुकसान का मुआवजा और होर्मुज को लेकर 1 नया कानूनी ढांचा बनाने की भी सख्त मांग रखी है।
डोनाल्ड ट्रंप का रुख और बातचीत की गुंजाइश
ईरान का यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच शांति वार्ता लगभग ठप पड़ी हुई थी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में बयान दिया था कि अमेरिका फोन पर बातचीत के लिए तैयार है। ट्रंप ने कहा था कि अगर ईरान बात करना चाहता है, तो वे सीधे फोन कर सकते हैं। हालांकि, ट्रंप ने यह भी साफ कर दिया है कि ईरान को किसी भी हालत में परमाणु हथियार विकसित करने की इजाजत नहीं दी जाएगी। इससे पहले अमेरिका ने अपनी 1 टीम को ईरान भेजने का प्लान भी रद्द कर दिया था, क्योंकि वाशिंगटन पुराने प्रस्तावों से संतुष्ट नहीं था।
पुतिन से मिलेंगे ईरान के विदेश मंत्री अराघची
इस तनावपूर्ण माहौल के बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची 3 दिन के भीतर 2 बार पाकिस्तान का दौरा कर चुके हैं। इस्लामाबाद में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और शीर्ष सैन्य अधिकारियों से मुलाकात करने के बाद वे ओमान गए थे। अब अराघची रूस के लिए रवाना हो गए हैं, जहां वे राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात करेंगे। माना जा रहा है कि इस अहम बैठक में युद्ध और अमेरिका के कड़े रुख को लेकर रूस का समर्थन जुटाने पर चर्चा होगी।
क्या अमेरिका मानेगा ईरान की शर्तें?
कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि ईरान ने यह प्रस्ताव भले ही भेज दिया हो, लेकिन इस पर अमेरिका की सहमति बनना लगभग नामुमकिन है। अमेरिका लगातार यह दबाव बना रहा है कि ईरान कम से कम 10 साल के लिए अपना न्यूक्लियर एनरिचमेंट (परमाणु कार्यक्रम) पूरी तरह रोक दे और अपने मौजूदा भंडार को देश से बाहर भेज दे। अमेरिका बिना इस शर्त को माने युद्धविराम के पक्ष में नहीं है। ऐसे में ईरान का यह नया ‘ऑफर’ फिलहाल 1 कूटनीतिक दांव से ज्यादा कुछ नजर नहीं आ रहा है।
