Bharatmala Project Scam:छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) में भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) और आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) की ताबड़तोड़ कार्रवाई जारी है। प्रदेश के बहुचर्चित ‘भारतमाला परियोजना’ (Bharatmala Project) भूमि मुआवजा घोटाले में ईडी ने एक बार फिर बड़ा एक्शन लिया है। रायपुर और महासमुंद जिले में अधिकारियों, जमीन दलालों और राजनीतिक रसूखदारों के 9 ठिकानों पर एक साथ दबिश दी गई। इस रेड में राज्य के एक पूर्व मंत्री के चचेरे भाई और उनके करीबियों के नाम भी सामने आए हैं, जिससे प्रदेश की राजनीति में हड़कंप मच गया है।
पूर्व मंत्री के रिश्तेदारों और दलालों के 9 ठिकानों पर दबिश
भारतमाला प्रोजेक्ट के तहत रायपुर-विशाखापट्टनम आर्थिक कॉरिडोर के निर्माण के लिए जो जमीनें अधिग्रहित की गई थीं, उनमें करोड़ों रुपये का फर्जीवाड़ा किया गया है।
- इसी सिलसिले में ईडी की अलग-अलग टीमों ने सीआरपीएफ (CRPF) जवानों के साथ सुबह-सुबह रायपुर और महासमुंद में 9 स्थानों पर छापे मारे।
- जांच के दौरान पूर्व मंत्री कवासी लखमा के करीबियों और रिश्तेदारों के परिसरों पर भी तलाशी ली गई।
- इस पूरे घोटाले के मुख्य सरगना माने जा रहे प्रॉपर्टी डीलर हरमीत सिंह खनूजा और उनके रिश्तेदारों (जसबीर सिंह बग्गा और हरमीत चावला) के घरों पर भी सघन जांच हुई।
- ईडी की इस कार्रवाई में खनूजा के ठिकानों से 40 लाख रुपये नकद और जमीन से जुड़े कई अहम डिजिटल दस्तावेज जब्त किए गए हैं।
क्या है पूरा भारतमाला भूमि मुआवजा घोटाला?
यह पूरा खेल केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी सड़क परियोजना से जुड़ा है। रायपुर से विशाखापट्टनम तक बनने वाले 465 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे के लिए किसानों की जमीनें ली जानी थीं।
- घोटालेबाजों को जब इस प्रोजेक्ट के रूट की भनक लगी, तो उन्होंने राजस्व अधिकारियों (पटवारी, तहसीलदार, एसडीएम) के साथ मिलकर गहरी साजिश रची।
- साल 2020 से पहले की बैक-डेट (पुरानी तारीखों) में जमीनों की रजिस्ट्री और नामांतरण कराया गया। एक ही जमीन को कई टुकड़ों में बांटकर फर्जी किसानों के नाम पर दस्तावेज तैयार किए गए।
- इसके बाद नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) से तय राशि से 2 से 3 गुना ज्यादा मुआवजा वसूला गया।
- जांच में अब तक 32 करोड़ रुपये से लेकर 78 करोड़ रुपये तक के गलत भुगतान और हेराफेरी की पुष्टि हो चुकी है।
कई अधिकारियों पर गिरी गाज, 3 पटवारी गिरफ्तार
इस महाघोटाले में सफेदपोशों के साथ-साथ सरकारी सिस्टम की भी बड़ी मिलीभगत रही है। ईओडब्ल्यू (EOW) पहले ही इस मामले में 3 पटवारियों को गिरफ्तार कर चुकी है, जबकि 5 अन्य बड़े राजस्व अधिकारी अभी भी फरार चल रहे हैं।
राज्य सरकार के राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने स्पष्ट कर दिया है कि भ्रष्टाचार में लिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। ईडी और ईओडब्ल्यू की इस संयुक्त जांच से आने वाले दिनों में कई और बड़े नेताओं और नौकरशाहों के चेहरे से नकाब उतरने की पूरी संभावना है।
