मशहूर भारतीय बिजनेसमैन और फिल्म मेकर एटलस रामचंद्रन (Atlas Ramachandran) का रविवार को 80 वर्ष की आयु में दुबई में निधन (death) हो गया. इनका असली नाम एमएम रामचंद्रन था. जानकारी के मुताबिक, रामचंद्रन को सीने में दर्द की शिकायत के बाद शनिवार को उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था. यहां दिल का दौरा (heart attack) पड़ने के बाद उन्होंने आखिरी सांस ली. वे कई दिनों से बीमार चल रहे थे.

रामचंद्रन अब बंद हो चुके एटलस ज्वेलरी के फाउंडर थे और वे लंबे समय से दुबई में रह रहे थे. इस साल अगस्त में उन्होंने दुबई स्थित बुर आवास पर अपना 80वां जन्मदिन मनाया था. केरल में जन्मे रामचंद्रन को फिल्मों का काफी शौक था. उन्होंने कई मलयालम फिल्मों का प्रॉडक्शन किया और 13 फिल्मों में अभिनय और निर्देशन किया था.

30 साल पहले शुरू किया था ज्वेलरी बिजनेस
रामचंद्रन का जन्म 1942 में केरल के त्रिशूर जिले में हुआ था. अपनी एटलस ज्वैलरी बिजनेस के विज्ञापन की अनूठी शैली की वजह से उनका नाम एटलस रामचंद्रन पड़ गया. रामचंद्रन ने एटलस ज्वैलरी की शुरुआत करीब तीन दशक पहले की थी. कुवैत, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात में इसकी लगभग 50 शाखाएं थीं. केरल में भी उनकी शाखाएं थीं. एटलस ग्रुप ने हेल्थकेयर, रियल एस्टेट और फिल्म क्षेत्र में भी कदम रखा था.

धोखाधड़ी के आरोप में गिरफ्तार
रामचंद्रन ने बिजनेस की शुरुआत से पहले एक बैंक कर्मचारी के रूप में भी काम किया था. रामचंद्रन को फिल्मों का शौक था और उन्होंने मलयालम फिल्मों में अभिनय और प्रॉडक्शन किया था. पॉपुलर मलयालम फिल्में वैशाली और सुक्रुथम का प्रॉडक्शन रामचंद्रन ने ही किया था. 2015 में रामचंद्रन को दुबई में वित्तीय धोखाधड़ी के आरोप में गिरफ्तार किया गया था और तीन साल की जेल हुई थी. उनके परिवार में पत्नी इंदिरा और दो बच्चे डॉ मंजू और श्रीकांत हैं.

इस तरह शुरू हुआ बिजनेस
रामचंद्रन दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से इकॉनमिक्स से ग्रेजुएशन किया है. बाद में वे भारतीय स्‍टेट बैंक में परिवीक्षाधीन अधिकारी चुने जाने गए. इसके बाद स्टेट बैंक ऑफ त्रावणकोर में एक फील्ड अधिकारी, लेखाकार और प्रबंधक के रूप में काम किया. जब उन्होंने बैंक छोड़ा, तब तक वे 100 से अधिक शाखाओं के अधीक्षक थे. रामचंद्रन 1974 में कुवैत के वाणिज्यिक बैंक में काम करने के लिए कुवैत शहर चले गए. वहां वे बैंक के अंतर्राष्ट्रीय प्रभाग के प्रशासन प्रबंधक रहे. कुवैत में उन्‍होंने देखा कि सोने की गहनों की बहुत मांग है. इसी को देखते हुए उन्‍होंने कुवैत के सूक अल वत्या में पहला एटलस शोरूम खोला.

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