12वीं कक्षा में टॉप-10 में जगह बनाने वाली आयशा को वक्फ बोर्ड ने किया सम्मानित

रायपुर. 12वीं बोर्ड की परीक्षा में टॉप टेन में मुस्लिम समाज की दो छात्राओं ने सातवां स्थान हासिल किया है। छत्तीसगढ़ राज्य वक़्फ़ बोर्ड ने इस पर खुशी जताते हुए दोनों छात्राओं को सम्मानित किया है। छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा घोषित बोर्ड परीक्षाओं के परिणाम के साथ ही टॉप टेन की सूची भी जारी की गई है।

इसमें कक्षा बारहवीं की प्रावीण्य सूची में माता सुंदरी पब्लिक स्कूल रायपुर की छात्रा  आयेशा अंजुम ने सातवां स्थान हासिल किया है। इसी तरह एमजीएम स्कूल, बालको, कोरबा की छात्रा फरीन कुरैशी ने भी टॉप टेन की सूची में सातवां स्थान बनाया है।

छत्तीसगढ़ राज्य वक़्फ़ बोर्ड के चैयरमेन सलाम रिजवी ने अपनी टीम के साथ आयेशा अंजुम के नूरानी चौक स्थित निवास पर जाकर उसका सम्मान किया। आयेशा को वक़्फ़ बोर्ड की ओर से प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिन्ह भेंट किया गया। इस मौके पर आयेशा के पिता मो. रफीक के अलावा उनके परिजन और शुभचिंतक मौजूद थे।

वक़्फ़ बोर्ड की ओर से चैयरमेन सलाम रिजवी के साथ अधिवक्ता शाहिद इक़बाल, ज़कात फाउंडेशन के मो. ताहिर, शिक्षाविद शाइस्ता रूही खान, पत्रकार शमी इमाम और मो. तारिक अशरफी ने भी छात्रा आयेशा और उसके परिजनों को बधाई दी।  इसी तरह बारहवीं की परीक्षा में सातवां स्थान हासिल करने वाली कोरबा की छात्रा फरीन कुरैशी को भी प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिन्ह प्रेषित किया गया।

वक़्फ़ बोर्ड चैयरमेन सलाम रिजवी ने उम्मीद जताई है कि समाज की दोनों प्रतिभावान छात्राएं आगे भी सफलता के कदम चूमेंगी और अपने खानदान और कौम के साथ ही पूरे राज्य का नाम रौशन करेंगीं।

ज़कात फाउंडेशन के स्टूडेंट को सभी विषय मे मिला डिस्टिंक्शन

जरूरतमंद विद्यार्थियों को मदद करने वाली संस्था छत्तीसगढ़ ज़कात फाउंडेशन के स्टूडेंट सरफ़राज़ कुरैशी ने 93 प्रतिशत अंक हासिल करके संस्था को गौरवान्वित किया है । रायपुर निवासी मुमताज कुरैशी के पुत्र सरफ़राज़ ने रविवि परिसर स्थित शासकीय हायर सेकंडरी स्कूल में कक्षा 10वीं की पढ़ाई की। सरफ़राज़ को सभी विषय में डिस्टिंक्शन मिले हैं।

परीक्षा परिणाम की जानकारी मिलते ही सरफ़राज़ के परिजनों, स्कूल शिक्षक और ज़कात फाउंडेशन परिवार के बीच खुशी का आलम है।   गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ ज़कात फाउंडेशन द्वारा मुस्लिम समाज के लोगों से मिले ज़कात से जरूरतमंद विद्यार्थियों को आर्थिक मदद दी जाती है। इसके अलावा युवाओं और महिला समूहों  को रोजगारमूलक प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। ज़कात की मदद से पढ़े अनेक विद्यार्थी आज इंजीनियरिंग करने के बाद नौकरी कर रहे हैं, वहीं अनेक महिलाएं रोजगार से जुड़कर अपना परिवार चला रहीं हैं।

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