नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सर कार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने शुक्रवार को कहा कि देश में राम और रोटी साथ-साथ चलेंगे। राम मंदिर का निर्माण केवल धार्मिक मामला नहीं है यह राष्ट्र के विकास का प्रतीक है। राम मंदिर का निर्माण, राष्ट्र निर्माण का पूरक और पोषक है। यह सांस्कृतिक और वैचारिक गुलामी से स्वतंत्रता का प्रतीक है।

संघ के शीर्ष पदाधिकारियों में से एक दत्तात्रेय होसबोले ने यहां राम जन्मभूमि पर लिखी एक पुस्तक का विमोचन करते हुए राम मंदिर के बहाने देश में सेकुलरिज्म के नाम पर चल रही बहस पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा, “सेकुलरिज्म के नाम पर कोई देश अपनी राष्ट्रीयता से समझौता नहीं कर सकता। जिस देश को अपनी सांस्कृतिक जड़ों, राष्ट्रीयता की पहचान का बोध नहीं होता, वह राष्ट्र राष्ट्र नहीं सिर्फ जमीन का टुकड़ा रह जाता है।”

Ayodhya Ram Temple

अरुण आनंद और डॉ. विनय नालवा की लिखी पुस्तक रामजन्मभूमि-ट्रूथ, एविडेंस और फेथ का विमोचन करते हुए दत्तात्रेय होसबोले ने कहा कि कुछ लोगों ने सेकुलरिज्म का अर्थ विकृत किया। राष्ट्रीयता के बारे में या तो उन्हें जानकारी नहीं है या जानबूझकर लोगों को बहकाने का उन्होंने प्रयास किया। स्वतंत्रता सिर्फ राजनैतिक नहीं होती बल्कि वैचारिक और सांस्कृतिक गुलामी से स्वतंत्रता जरूरी है। अंग्रेज चले गए, लेकिन अंग्रेजियत आज भी इधर-उधर दिखती है।

संघ के सह सर कार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को रामराज्य का आत्मविश्वास और भारतीय संस्कृति का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि आज राम मंदिर के निर्माण का स्वर्णिम क्षण आ गया है। अब अयोध्या के संदेश को देश में पहुंचाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि देश में वर्ष 1984 से लेकर 1992 तक का समय राम मंदिर आंदोलन का चरम काल था। इस दौरान जब भारत में राष्ट्रीयता की बहस चल रही थी, तब जर्मनी सहित विश्व के अन्य देशों में भी उसी तरह की बहस चल रही थी।

Dattatreya Hosabale

होसबोले ने कहा कि राम मंदिर का निर्माण सिर्फ धार्मिक मामला नहीं है बल्कि यह देश की संस्कृति से जुड़ा है। धर्मनिरपेक्षता के बहाने मंदिर का विरोध करने वालों को राष्ट्रीयता के बारे में ज्ञान नहीं है।

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