रायपुर. छत्तीसगढ़ अपने घने जंगलों, वन्यजीवों और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए देश भर में विख्यात है। इसी प्राकृतिक धरोहर को और अधिक सहेजने तथा पर्यटकों को एक नया और प्रामाणिक अनुभव देने के लिए बलौदाबाजार जिले में स्थित ‘Baranwapara Devpur Nature Camp’ इको-टूरिज्म (Eco-Tourism) के एक नए और आकर्षक केंद्र के रूप में उभर रहा है।
Baranwapara Devpur Nature Camp: ‘मड हाउस’ का अनूठा अनुभव
देवपुर वन परिक्षेत्र, जो बारनवापारा वन्यजीव अभयारण्य (Barnawapara Wildlife Sanctuary) के ठीक करीब स्थित है, अब अपने सस्टेनेबल और इको-फ्रेंडली ‘मड हाउस’ (Mud House) रिसॉर्ट्स के लिए पर्यटकों की पहली पसंद बन रहा है। वन विभाग और पर्यटन बोर्ड की संयुक्त पहल से देवपुर में बांस और मिट्टी से निर्मित पारंपरिक आवास (Mud Houses) तैयार किए जा रहे हैं। ये घर न केवल पर्यटकों को ग्रामीण जीवन और प्रकृति के करीब लाते हैं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय आदिवासी समुदायों के सतत विकास में भी अहम भूमिका निभा रहे हैं।
ब्रिटिश कालीन हेरिटेज और जंगल सफारी
इस नेचर कैंप का एक मुख्य आकर्षण देवपुर का ब्रिटिश कालीन फॉरेस्ट रेस्ट हाउस (Colonial era forest resthouse) है, जिसे 1927-1928 के आसपास बनवाया गया था। हाल ही में इसके जीर्णोद्धार के बाद यह जगह पर्यटकों को इतिहास और प्रकृति का एक अद्भुत संगम प्रदान कर रही है। ‘Baranwapara Devpur Nature Camp’ में ठहरने वाले पर्यटक आसानी से बारनवापारा की रोमांचक जंगल सफारी का आनंद ले सकते हैं, जहां वे इंडियन बाइसन (Gaur), तेंदुए, भालू और विभिन्न प्रकार के पक्षियों को उनके प्राकृतिक आवास में देख सकते हैं।
इको-टूरिज्म से ग्रामीण रोजगार को बढ़ावा
इन मड हाउस और नेचर कैंप्स के संचालन से आसपास के वन ग्रामों और आदिवासी समुदायों को सीधा रोजगार मिल रहा है। स्थानीय लोग टूर गाइड, कैटरिंग और हस्तशिल्प बिक्री के जरिए अपनी आजीविका चला रहे हैं। यदि आप शहरी भागदौड़ से दूर एक शांत, प्राकृतिक और प्रदूषण-मुक्त छुट्टियां बिताना चाहते हैं, तो देवपुर नेचर कैंप आपके लिए एक परफेक्ट डेस्टिनेशन है।
