सरकारी निविदा (Tender) बाज़ार में एमएसएमई (MSME) को मिलने वाली छूट पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक ताज़ा और अहम फ़ैसला सुनाया है। ताज़ा MSME Tender Evaluation (एमएसएमई टेंडर इवैल्यूएशन) न्यूज़ अपडेट के अनुसार, जशपुर ज़िला अस्पताल में आहार सेवाओं के लिए जारी एक बड़े टेंडर को कोर्ट ने रद्द कर दिया है। न्यूज़ रिपोर्ट्स के मुताबिक़, टेंडर प्रक्रिया में एमएसएमई को अनुभव और टर्नओवर में पूरी छूट देने का वादा किया गया था, लेकिन मूल्यांकन के दौरान अधिकारियों ने मनमानी करते हुए उन्हें केवल 10 अंक दिए। रोज़ सामने आ रही ऐसी प्रशासनिक अनियमितताओं के ख़िलाफ़ चीफ़ जस्टिस की बेंच ने सख़्त रुख़ अपनाया है। यह क़ानूनी व्यवस्था को पारदर्शी बनाने की दिशा में एक तेज़ और ख़ास क़दम है। अदालत ने इस मनमानी को समानता के अधिकार के विरुद्ध मानते हुए ज़्यादा निष्पक्षता बरतने पर पूरा ज़ोर दिया है।
मूल्यांकन में मनमानी और ‘अधिश्री स्व सहायता समूह’ की याचिका
यह मामला 19 फ़रवरी 2026 को जारी 60 लाख रुपये के आहार सेवा टेंडर से जुड़ा है। इसके लिए न्यूनतम 50 लाख रुपये का टर्नओवर अनिवार्य था, लेकिन एमएसएमई को इससे स्पष्ट छूट दी गई थी। याचिकाकर्ता ‘अधिश्री स्व सहायता समूह’ एक पंजीकृत एमएसएमई है, जिसे पूर्ण छूट देने के बजाय मूल्यांकन में बेहद कम अंक देकर ‘H2’ श्रेणी में डाल दिया गया। कोर्ट ने इस प्रक्रिया को असंवैधानिक क़रार दिया है। प्रशासन अब वाई-फ़ाई (Wi-Fi) नेटवर्क के ज़रिए नई टेंडर प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन और पारदर्शी बनाने की तैयारी कर रहा है।
हाईकोर्ट का नया निर्देश और रद्द हुआ टेंडर
हाईकोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 14 का हवाला देते हुए टेंडर की सभी कार्रवाइयों को पूरी तरह निरस्त कर दिया है। अदालत ने प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिया है कि नई निविदा प्रक्रिया में एमएसएमई के अधिकारों की बिल्कुल अनदेखी न हो।
