छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) राज्य महिला आयोग ने न्याय की गुहार लगा रही महिलाओं के हक़ में एक बेहद अहम और सख़्त क़दम उठाया है। ताज़ा CG Mahila Ayog Hearing (सीजी महिला आयोग हियरिंग) न्यूज़ के अनुसार, आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक ने रायपुर में 390वीं प्रदेश स्तरीय जनसुनवाई की। इस दौरान कुल 31 प्रकरणों पर अहम फ़ैसला लिया गया। न्यूज़ रिपोर्ट्स के मुताबिक़, भिलाई स्टील प्लांट (BSP) और पुलिस विभाग की लापरवाही के ख़िलाफ़ कड़ा रुख़ अपनाया गया है, जिसकी रोज़ प्रशासनिक बाज़ार में तेज़ चर्चा हो रही है।
CG Mahila Ayog Hearing: BSP प्रबंधन को सख़्त फटकार
जनसुनवाई में भिलाई स्टील प्लांट से जुड़ा एक बेहद ख़ास और चौंकाने वाला मामला सामने आया। एक कर्मचारी दो महिलाओं के साथ अवैध संबंध रखकर अपनी पत्नी और बच्चों को भरण-पोषण नहीं दे रहा था। आयोग ने पाया कि बीएसपी के बड़े अधिकारी ‘लॉ डिपार्टमेंट’ का बहाना बनाकर ऐसे मामलों को रफ़ा-दफ़ा कर देते हैं। डॉ. नायक ने ज़्यादा ज़ोर देते हुए बीएसपी प्रबंधन को कड़ी फटकार लगाई और अनुशासन नियमों में सख़्त बदलाव करने का निर्देश दिया।
निर्दोष महिला और 4 माह के मासूम को जेल
कबीरधाम ज़िले के पिपरिया थाने का मामला पुलिसिया लापरवाही की सख़्त हक़ीक़त बयां करता है। एक पुलिस आरक्षक और उसकी पत्नी ने आपसी विवाद में पड़ोसियों पर फ़र्ज़ी एफ़आईआर (FIR) दर्ज करा दी। इस मामले में पुलिस की मिलीभगत से एक निर्दोष महिला और उसके 4 माह के मासूम बच्चे को 2 महीने तक जेल में रहना पड़ा। आयोग ने इसे मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन माना है।
DGP और ज़िला प्रशासन को दिए गए कड़े निर्देश
पुलिस की इस भारी लापरवाही के मामले में आयोग ने सीधे छत्तीसगढ़ के डीजीपी (DGP) और राज्य पुलिस जवाबदेही प्राधिकार को 1 महीने के भीतर अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट सौंपने का सख़्त आदेश दिया है। इसके अलावा, भारत माला परियोजना में 1.64 करोड़ रुपये के मुआवज़े और संपत्ति विवाद के मामलों में भी कलेक्टर को निर्देश दिए गए हैं। यह जनसुनवाई पीड़ित परिवारों के लिए न्याय की एक बड़ी उम्मीद बनी है।
