छत्तीसगढ़ में जनता की समस्याओं के लिए Digital Grievance System, मंत्री-विधायक होंगे हाईटेक

Digital Grievance System

छत्तीसगढ़ में अब जनता की समस्याओं और शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए राज्य सरकार पूरी तरह से हाईटेक होने जा रही है। प्रदेश में एक नया Digital Grievance System (डिजिटल शिकायत प्रणाली) लागू किया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य आम नागरिकों को सरकारी दफ्तरों और मंत्रियों के बंगलों के चक्कर लगाने से बचाना और कामकाज में पारदर्शिता लाना है।

90 विधानसभा क्षेत्रों को मिलेगी अलग ‘डिजिटल आईडी’

इस नई डिजिटल व्यवस्था के तहत, छत्तीसगढ़ की सभी 90 विधानसभा क्षेत्रों को एक अलग यूनिक (Unique) डिजिटल आईडी और पासवर्ड दिया जाएगा। इस सिस्टम को सीधे तौर पर संबंधित क्षेत्र के विधायक या मंत्री द्वारा संचालित किया जाएगा।

इस प्रक्रिया के काम करने का तरीका कुछ इस प्रकार होगा:

  • आम नागरिक इस ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर अपनी शिकायत या समस्या दर्ज कराएंगे।
  • शिकायत सीधे संबंधित विधायक या मंत्री के डिजिटल डैशबोर्ड पर पहुंचेगी।
  • जनप्रतिनिधि डिजिटल माध्यम से ही अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश देंगे।

सरकार का दावा है कि इस नए सिस्टम से कागजी फाइलों की रफ्तार तेज होगी और शिकायतों का जल्द से जल्द निपटारा सुनिश्चित किया जा सकेगा।

विपक्ष ने कसा तंज: “सिर्फ दिखावा है यह सिस्टम”

सरकार की इस हाईटेक पहल पर विपक्ष ने जमकर निशाना साधा है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि सरकार को पहले मंत्रियों के बंगलों के बाहर खड़ी फरियादियों की भारी भीड़ की सुनवाई करनी चाहिए।

पूर्व विधायक विकास उपाध्याय ने सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि जमीनी स्तर पर जनता की समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं और सरकार सिर्फ ‘डिजिटल दिखावा’ कर रही है। विपक्ष का स्पष्ट मानना है कि सिर्फ शिकायत करने का तरीका बदलने से आम आदमी को कोई वास्तविक राहत नहीं मिलेगी।

भाजपा का पलटवार और भविष्य की राह

विपक्ष के इन तीखे हमलों पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने भी कड़ा पलटवार किया है। प्रदेश प्रवक्ता शिव नारायण पांडेय ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कांग्रेस को सरकार के हर अच्छे प्रयास में सिर्फ राजनीति ही नजर आती है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि यह Digital Grievance System पूरी तरह से जनता की सुविधा के लिए लाया गया है और इससे आम लोगों को सीधा लाभ मिलेगा।

यह देखना काफी दिलचस्प होगा कि क्या यह नई व्यवस्था वास्तव में जमीनी समस्याओं का स्थायी समाधान कर पाएगी या यह सिर्फ शिकायतों की पेंडेंसी (देरी) को एक नया डिजिटल रूप दे देगी।