छत्तीसगढ़: किसानों को मिला 10000 करोड़ रुपये का भुगतान, धान की अंतर राशि जारी

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रायपुर. छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के लाखों धान उत्पादक किसानों को होली के त्योहार से पहले भारी आर्थिक राहत प्रदान की है। कृषक उन्नति योजना के तहत राज्य के 25 लाख 28 हजार से अधिक किसानों के बैंक खातों में 10000 करोड़ रुपये से अधिक की धान की अंतर राशि सीधे ट्रांसफर कर दी गई है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पूर्व में ही यह घोषणा की थी कि अन्नदाताओं को उनके धान के उचित मूल्य का भुगतान होली से पहले हर हाल में कर दिया जाएगा, ताकि वे त्योहार को पूरे उत्साह के साथ मना सकें। इसी वादे को पूरा करते हुए 28 फरवरी 2026 को बिलासपुर जिले के बिल्हा सहित प्रदेश के 146 विकासखंडों में आयोजित कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों के बैंक खातों में यह राशि जमा की गई है। सरकार के इस कदम से राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में नकदी का प्रवाह तेजी से बढ़ेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।

  • खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के दौरान छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा राज्य के किसानों से 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से रिकॉर्ड 141 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी की गई है।
  • किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य का भुगतान धान खरीदी के समय ही कर दिया गया था, जबकि 3100 रुपये की दर के आधार पर बची हुई शेष अंतर राशि अब जारी की गई है।
  • इस 10000 करोड़ रुपये के नवीनतम भुगतान को मिलाकर, कृषक उन्नति योजना के तहत पिछले कुछ समय में किसानों को दी गई कुल वित्तीय सहायता का आंकड़ा 35000 करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है।
  • राज्य सरकार ने इस साल के बजट में किसानों और कृषि मजदूरों के लिए विशेष प्रावधान किए हैं, जिनमें सिंचाई पंपों को मुफ्त बिजली देने के लिए 5500 करोड़ रुपये की व्यवस्था शामिल है।
  • दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना के लिए भी सरकार ने 600 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है, ताकि कृषि क्षेत्र से जुड़े हर वर्ग को पूरी तरह से आर्थिक सुरक्षा मिल सके।

किसानों को धान का यह ऐतिहासिक मूल्य देने के मामले में छत्तीसगढ़ वर्तमान में देश का अग्रणी राज्य बन गया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बिल्हा में आयोजित मुख्य कार्यक्रम के दौरान किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य सरकार किसानों की खुशहाली और उनके आर्थिक सशक्तिकरण के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। बिचौलियों की भूमिका को पूरी तरह से समाप्त करते हुए यह पूरी 10000 करोड़ रुपये की राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में डीबीटी के माध्यम से भेजी गई है। इससे पहले राज्य सरकार द्वारा अन्य किसान हितैषी योजनाओं और समर्थन मूल्य को मिलाकर अन्नदाताओं के खातों में 1.50 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि ट्रांसफर की जा चुकी है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि फसल का उचित मूल्य और त्योहार से ठीक पहले भारी भरकम भुगतान मिलने से न केवल किसानों का जीवन स्तर सुधरेगा, बल्कि राज्य के बाजारों में भी तेजी देखने को मिलेगी। यह निर्णय इस बात का स्पष्ट संकेत है कि कृषि और ग्रामीण विकास राज्य सरकार की नीतियों के केंद्र में स्थापित है। प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया है कि बिना किसी तकनीकी बाधा के सभी 25 लाख 28 हजार पात्र किसानों तक उनका पैसा सुरक्षित पहुंच जाए।