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राज्यगीत ‘अरपा पैरी के धार’ स्कूल के पाठ्यक्रम में होगा शामिल

छत्तीसगढ़ में किया जाएगा द्विभाषिक पाठ्यपुस्तकों का मुद्रण

रायपुर. मुख्यमंत्री भूपेश की घोषणा के अनुरूप राज्य की प्राथमिक शालाओं की पाठ्यपुस्तकों में छत्तीसगढ़ राज्य का राज्यगीत ‘अरपा पैरी के धार‘ को शामिल किया जाएगा। राज्य शिक्षा स्थायी समिति की बैठक में आज इसका अनुमोदन पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर श्री केसरी लाल वर्मा की अध्यक्षता और समिति के सचिव एवं राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद के संचालक श्री जितेन्द्र शुक्ला की उपस्थिति में किया गया। बैठक राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद कार्यालय में आयोजित की गई।

मुख्यमंत्री ने घोषणा की थी कि बच्चों को उनकी मातृभाषा में पढ़ाया जाए। मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुरूप ही बैठक में बहुभाषा अंतर्गत द्विभाषिक पाठ्यपुस्तकों के मुद्रण से संबंधित जानकारी दी गई और इसके लिए औपचारिक सहमति प्रदान की गई। इस संबंध में बताया गया कि छत्तीसगढ़ राज्य में बोली और भाषाओं को पढ़ाने के लिए द्विभाषिक पाठ्यपुस्तकों का मुद्रण किया जाएगा। पाठ्य पुस्तक में एक पृष्ठ पर हिन्दी और उसी के सामने दूसरे पृष्ठ पर संबंधित भाषा में उसी पृष्ठ की पाठ्य सामग्री का मुद्रण किया जाएगा। इसके अलावा योग शिक्षा की पुस्तकों के संबंध में बैठक में उपस्थित सदस्यों और बुद्धिजीवियों द्वारा दिए गए सुझावों को कार्ययोजना में शामिल करने का निर्णय लिया गया।

बैठक में उपस्थित समिति के सदस्यों में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी डॉ. सुशील त्रिवेदी, पंडित रविशंकर विश्वविद्यालय रायपुर के प्रोफेसर मनोविज्ञान प्रियंवदा श्रीवास्तव, शिक्षाविद् बिलासपुर विवेक जोगेलकर, प्रतिनिधि माध्यमिक शिक्षा मंडल राजेश शर्मा, राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद के अधिकारी आर.एन. सिंह और योगेश शिवहरे सहित पाठ्यपुस्तक निगम के प्रतिनिधि और स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।

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