छत्तीसगढ़ में पाम ऑयल की खेती से किसानों को प्रति एकड़ 1.25 लाख रुपये के मुनाफे का अवसर

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रायपुर. छत्तीसगढ़ सरकार राज्य में किसानों की आय बढ़ाने और कृषि में विविधता लाने के उद्देश्य से पाम ऑयल (ताड़ के तेल) की खेती को व्यापक स्तर पर प्रोत्साहित कर रही है। कृषि और उद्यानिकी विभाग के संयुक्त प्रयासों से शुरू की गई इस पहल के तहत किसानों को पारंपरिक फसलों के बजाय पाम ऑयल की खेती करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है, जिससे वे प्रति एकड़ लगभग सवा लाख रुपये तक का शुद्ध वार्षिक मुनाफा कमा सकते हैं। राज्य सरकार ने इसके लिए राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन-ऑयल पाम के तहत एक विशेष अनुदान योजना लागू की है, जिसमें किसानों को रोपण सामग्री से लेकर रखरखाव तक आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है।

अधिकारियों के अनुसार, पाम की खेती एक दीर्घकालिक कृषि निवेश है, जिसमें एक बार पौधा लगाने के बाद किसान 25 से 30 वर्षों तक निरंतर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं। सरकार द्वारा किसानों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए प्रसंस्करण कंपनियों के साथ अनुबंध (एमओयू) भी सुनिश्चित किया गया है। इसके तहत अनुबंधित कंपनियां सीधे किसानों के खेतों से ही तय मूल्य पर पाम के ताजे फलों की खरीदी करेंगी, जिससे किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए किसी बाजार या मंडी में भटकने की आवश्यकता नहीं होगी।

  • पाम ऑयल की उन्नत खेती करने वाले किसानों को प्रति एकड़ सालाना 1.20 लाख से 1.25 लाख रुपये तक की निश्चित और नियमित आय प्राप्त हो सकती है।
  • राज्य सरकार द्वारा पौधों की खरीद, रोपण और पहले चार वर्षों तक उनके उचित रखरखाव के लिए भारी सब्सिडी की व्यवस्था की गई है।
  • खेतों की सुरक्षा के लिए फेंसिंग (बाड़ लगाने), ड्रिप सिंचाई प्रणाली और बोरवेल खनन के लिए भी किसानों को विशेष टॉप-अप अनुदान प्रदान किया जा रहा है।
  • पाम के पौधों के बीच खाली बची जगह में किसान इंटर-क्रॉपिंग (सह-फसली खेती) के जरिए सब्जियां या दलहन उगाकर शुरुआत से ही अतिरिक्त मुनाफा कमा सकते हैं।
  • रोपण के तीसरे या चौथे वर्ष से पौधों में व्यावसायिक रूप से फल आना शुरू हो जाता है, और समय के साथ पेड़ों के परिपक्व होने पर इनकी उत्पादन क्षमता बढ़ती जाती है।

पारंपरिक तिलहनी फसलों की तुलना में पाम ऑयल की प्रति हेक्टेयर तेल उत्पादन क्षमता चार से छह गुना अधिक होती है। इसी व्यापक लाभ को देखते हुए राज्य के बस्तर, रायगढ़ और महासमुंद सहित कई जिलों में सैकड़ों एकड़ भूमि पर पाम के नए बागान तैयार किए जा रहे हैं। प्रशासन इस योजना को सफल बनाने के लिए किसानों को निरंतर तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध करा रहा है। कृषि विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि पाम ऑयल की यह व्यावसायिक खेती न केवल छत्तीसगढ़ के किसानों को आर्थिक रूप से समृद्ध और आत्मनिर्भर बनाएगी, बल्कि खाद्य तेल के मामले में देश की विदेशी आयात पर निर्भरता को कम करने की दिशा में भी यह एक बेहद महत्वपूर्ण और ठोस कदम साबित होगी।