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भाजपा आरक्षण विरोधी – पुनिया

रायपुर. छत्तीसगढ़ पहुंचे पीएल पुनिया ने आरक्षण को लेकर केंद्र सरकार को घेरा, उन्होने भाजपा को आरक्षण विरोधी बताया, उन्होने कहा कि एक बार फिर भाजपा + मोदी सरकार + उत्तराखंड भाजपा सरकार ने मिलकर देश के संविधान अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति-पिछड़ा वर्ग के आरक्षण के मौलिक अधिकार पर शरारतपूर्ण, षडयंत्रकारी व घिनौना हमला बोला है।

इसका जीता जागता सबूत उत्तराखंड भाजपा सरकार की सुप्रीम कोर्ट में दी गई दलील है, जिसमें साफ तौर से कहा गया, कि एसटी, एससी वर्गों को संविधान में सरकारी नौकरियों में आरक्षण का मौलिक अधिकार नहीं है। यहां तक भी कहा गया कि एसटी, एससी वर्गों को सरकारी नौकरी में आरक्षण देने के प्रति सरकारों की कोई संवैधानिक जवाबदेही नहीं। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का पैरा 8 देखिएः-
“8. Mr. Ranjit Kumar, learned Senior Counsel appearing for the Appellants in SLP (C) No. 25508 of 2019, Mr. Mukul Rohtagi and Mr. P.S. Narsimha, learned Senior Counsel appearing for the State of Uttarakhand contended that there is no fundamental right to claim reservation in appointments or promotions to public posts. There is no constitutional duty on the part of the State Government to provide reservations. ……” 

भाजपा सरकार की इस संविधान तथा एसटी, एससी विरोधी दलील को सुप्रीम कोर्ट ने भी दुर्भाग्यवश स्वीकार कर लिया तथा अपने निर्णय में यह कहा कि सरकारी नौकरियों में आरक्षण देना या न देना सरकार की मर्जी पर निर्भर है। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के पैरा 12 को देखिएः-

“12. Article 16 (4) and 16 (4-A) empower the State to make reservation in matters of appointment and promotion in favour of the Scheduled Castes and Scheduled Tribes ‘if in the opinion of the State they are not adequately represented in the services of the State’. It is for the State Government to decide whether reservations are required in the matter of appointment and promotions to public posts…….”

पुनिया ने कहा कि इससे साफ है कि भाजपा आरक्षण के संविधान निहित अधिकार को ही पूरी तरह खत्म कर देना चाहती है।

2 मोदी सरकार आरक्षण व्यवस्था तोड़ने पर संसद को गुमराह कर रही है। आज संसद में एक बार फिर मोदी सरकार का एसटी, एससी, ओबीसी के खिलाफ पूर्वाग्रह व षड़यंत्र सामने आया, जब आरक्षण तोड़ने की दलील देने पर देश से माफी मांगने की बजाए मोदी सरकार ने अपना पल्ला झाड़कर इल्ज़ामात की राजनीति शुरू कर दी।

मोदी सरकार व सामाजिक न्याय मंत्री ने देश को यह नहीं बताया किः-
(I) उत्तराखंड की कांग्रेस सरकार ने कभी भी सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर नहीं की थी। मुकेश कुमार बनाम स्टेट ऑफ उत्तराखंड का सुप्रीम कोर्ट का 7 फरवरी, 2020 का निर्णय उत्तराखंड की भाजपा सरकार के द्वारा दायर किए गए  ‘S.L.P ¼civil½] 27715 of  2019* dated 19-11-2019* में आया है।
(II) सुप्रीम कोर्ट में अपील उत्तराखंड भाजपा सरकार द्वारा डाली गई, सुप्रीम कोर्ट में उत्तराखंड भाजपा सरकार के वकीलों ने दलील दी व उस दलील के आधार पर गरीबों के आरक्षण के अधिकार को रद्द कर दिया गया। तो ऐसे में कांग्रेस की पूर्व सरकार पर आरोप गढ़ने का कोई औचित्य नहीं बच जाता।

भाजपा व संघ परिवार ने बार-बार आरक्षण पर पुनर्विचार तथा आरक्षण को खत्म करने की मांग रखी है। इस बारे में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत व मनमोहन वैद्य का बयान उल्लेखनीय है।

4 मोदी सरकार ने एससी, एसटी सबप्लान खत्म कर अनुसूचित जाति पर कुठाराघात किया। अनुसूचित जाति पर मोदी सरकार में बेहिसाब हिंसा के बढ़ते मामले चौकाने वाले हैं। एनसीआरबी की रिपोर्ट के मुताबिक 2017 में 43,203 मामले दर्ज हुए, यानि कि हर रोज देश में 118 अनुसूचित जाति उत्पीड़न के मामले दर्ज हुए व हर घंटे अनुसूचित जाति उत्पीड़न के पाँच मामले दर्ज हुए।

यह साफ है कि भाजपा शासन में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग शोषण के शिकार हैं तथा न्याय से वंचित हैं। हमारे नेता राहुल गांधी ने आव्हान किया है कि कांग्रेस का हर साथी अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग शोषितों व वंचितों के संवैधानिक अधिकारों की बहाली की लड़ाई निर्णायक तौर से लड़ेंगे।

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