रायपुर. छत्तीसगढ़ की पूर्ववर्ती सरकार में बेहद ताकतवर नौकरशाह मानी जाने वाली और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की पूर्व उप सचिव सौम्या चौरसिया की कानूनी अड़चनें लगातार बढ़ती जा रही हैं। लगभग 2 महीने पहले दिसंबर 2025 और जनवरी 2026 में प्रवर्तन निदेशालय (ED) तथा राज्य की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (ACB) और आर्थिक अपराध शाखा (EOW) द्वारा उन्हें शराब घोटाले तथा भ्रष्टाचार के अलग-अलग मामलों में फिर से गिरफ्तार कर लिया गया था। इससे पहले वे कथित कोयला लेवी घोटाले में करीब 2.5 साल जेल में रहने के बाद सुप्रीम कोर्ट से जमानत पाकर बाहर आई थीं, लेकिन जांच एजेंसियों ने नए मामलों में उन पर दोबारा शिकंजा कस दिया। वर्तमान में उनकी जमानत याचिकाओं पर विभिन्न अदालतों में सुनवाई चल रही है, लेकिन अब तक उन्हें न्यायपालिका से कोई बड़ी राहत नहीं मिल सकी है। हाल ही में बिलासपुर हाईकोर्ट ने भी मामले की गंभीरता को देखते हुए उनकी अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया था, जिससे उनके लंबे समय तक न्यायिक हिरासत में रहने की प्रबल संभावना बन गई है।
- सौम्या चौरसिया को ED ने सबसे पहले 2 दिसंबर 2022 को 540 करोड़ रुपये के कथित कोयला लेवी घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में गिरफ्तार किया था।
- सर्वोच्च अदालत से सशर्त जमानत मिलने के बाद वे रिहा हुई थीं, लेकिन 16 दिसंबर 2025 को ED ने उन्हें 3200 करोड़ रुपये से अधिक के शराब घोटाले में फिर से गिरफ्तार कर लिया।
- ED की हिरासत अवधि समाप्त होने के तुरंत बाद 2 जनवरी 2026 को छत्तीसगढ़ EOW और ACB ने भी भ्रष्टाचार के एक अन्य मामले में उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
- जांच एजेंसियों ने अदालत में दावा किया है कि शराब और कोयला घोटालों के सिंडिकेट को नीतिगत बदलावों में मदद करने और अवैध वसूली में उनकी सबसे प्रमुख भूमिका रही है।
- बचाव पक्ष ने इस हालिया गिरफ्तारी के आधार (ग्राउंड ऑफ अरेस्ट) को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिस पर देश की सर्वोच्च अदालत में कानूनी प्रक्रिया निरंतर जारी है।
प्रवर्तन निदेशालय के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, राज्य में हुए इन बड़े घोटालों में वरिष्ठ नौकरशाहों, राजनेताओं और कुछ प्रभावशाली व्यापारियों का एक बड़ा और संगठित सिंडिकेट काम कर रहा था। जांच एजेंसियों ने कई डिजिटल सबूतों, वॉट्सऐप चैट और छापेमारी में जब्त की गई डायरियों के आधार पर यह दावा किया है कि इन अवैध गतिविधियों के जरिए करोड़ों रुपये की संपत्ति बनाई गई थी। दूसरी ओर, बचाव पक्ष के वकीलों का न्यायालय में यह तर्क है कि जांच एजेंसियां एक ही अधिकारी को बार-बार अलग-अलग मामलों में फंसाकर प्रताड़ित कर रही हैं। उनके वकीलों ने अदालत में यह दलील भी दी है कि यह उनकी 5वीं या 6ठी गिरफ्तारी है और वे पूरी जांच प्रक्रिया में सहयोग कर रही हैं। हालांकि, PMLA की विशेष अदालत और राज्य के हाईकोर्ट द्वारा तत्काल कोई राहत न दिए जाने के बाद अब उनकी सारी उम्मीदें देश की सर्वोच्च अदालत के फैसले पर ही टिकी हैं। छत्तीसगढ़ का यह बहुचर्चित प्रशासनिक और राजनीतिक मामला प्रदेश भर में लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है, और आने वाले दिनों में कानूनी कार्यवाही ही यह तय करेगी कि सौम्या चौरसिया को जेल की सलाखों से कब तक मुक्ति मिल पाती है।
