CM Vishnu Deo Sai Sarhul festival: सरहुल पर्व को सहेजना हम सबकी बड़ी ज़िम्मेदारी, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का संदेश

Chief Minister Vishnu Deo Sai greeting the tribal community and highlighting the significance of the Sarhul festival in Chhattisgarh.

छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय (Vishnu Deo Sai) ने प्रदेश की महान आदिवासी संस्कृति और परंपराओं को लेकर एक बेहद अहम् संदेश दिया है। ताज़ा CM Vishnu Deo Sai Sarhul festival (सीएम विष्णु देव साय सरहुल फेस्टिवल) अपडेट के अनुसार, मुख्यमंत्री ने सरहुल पर्व के पावन अवसर पर प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए इसे जनजातीय समाज की एक अनूठी धरोहर बताया है। जनसंपर्क विभाग (DPRCG) द्वारा जारी इस आधिकारिक बयान ने लोक-संस्कृति के संरक्षण को लेकर एक नई और सकारात्मक चर्चा छेड़ दी है।

CM Vishnu Deo Sai Sarhul festival: प्रकृति (Nature) और आस्था का महापर्व

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि सरहुल केवल एक त्योहार नहीं है, बल्कि यह प्रकृति की उपासना और धरती माता के प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त करने का एक पवित्र माध्यम है। CM Vishnu Deo Sai Sarhul festival के इस ख़ास मौक़े पर उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि आदिवासी समाज सदियों से जंगलों, पेड़ों और पर्यावरण (Environment) का सबसे बड़ा रक्षक रहा है। इस महान जीवन शैली और प्रकृति प्रेम को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना वक़्त की सबसे बड़ी ज़रूरत है।

जनजातीय धरोहर (Tribal Heritage) का संरक्षण है ज़रूरी

आधुनिकता के इस तेज़ दौर में अपनी मूल संस्कृति से जुड़े रहना किसी भी समाज के लिए एक बड़ी चुनौती है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि हमारी आदिवासी कला, लोक-गीत और पर्व ही हमारी असली पहचान हैं। प्रशासन इस समृद्ध विरासत को सहेजने के लिए हर संभव क़दम उठा रहा है, लेकिन इसके लिए आम जनता की सक्रिय भागीदारी सबसे ज़्यादा मायने रखती है।

विकास (Development) और संस्कृति का शानदार तालमेल

सरहुल पर्व के अवसर पर दिया गया यह संदेश साफ़ तौर पर दर्शाता है कि प्रदेश सरकार केवल बुनियादी ढांचे के विकास पर ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक जड़ों को मज़बूत करने पर भी पूरा ध्यान केंद्रित कर रही है। यह सकारात्मक नज़रिया छत्तीसगढ़ को एक सशक्त और समृद्ध राज्य बनाने की दिशा में एक बड़ा क़दम है।