मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की बड़ी अपील: घर में रखी पुरानी पांडुलिपियां बनेंगी ‘डिजिटल धरोहर’, ऐसे बनें अभियान का हिस्सा

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और प्राचीन पांडुलिपियों के संरक्षण का प्रतीकात्मक चित्र

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत और प्राचीन ज्ञान परंपरा को हमेशा के लिए संरक्षित करने के उद्देश्य से एक बड़ी पहल की है। उन्होंने राज्य के सभी नागरिकों से Gyanbharatam Mission Chhattisgarh (ज्ञानभारतम राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान) में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने का आह्वान किया है।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि हमारे पूर्वजों द्वारा छोड़ी गई प्राचीन पांडुलिपियां और हस्तलिखित ग्रंथ हमारी समृद्ध सभ्यता के जीवंत प्रमाण हैं, जिन्हें आज डिजिटल माध्यम से सहेजना वक्त की सबसे बड़ी जरूरत है।

26 जिलों में समितियां गठित, 6 में सर्वे का काम शुरू

केंद्र सरकार द्वारा मार्च 2026 से शुरू किए गए इस अहम राष्ट्रव्यापी अभियान में छत्तीसगढ़ पूरी सक्रियता के साथ भाग ले रहा है।

अभियान की प्रगति के बारे में जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि:

  • राज्य के 33 जिलों में से 26 जिलों में ‘जिला स्तरीय समितियों’ का गठन और नोडल अधिकारियों की नियुक्ति पूरी कर ली गई है। शेष 7 जिलों में भी यह प्रक्रिया अंतिम चरण में है।
  • संस्कृति विभाग (Culture Department) द्वारा क्षेत्रीय संयोजकों के साथ मिलकर जिला स्तर पर प्रशिक्षकों को विशेष ट्रेनिंग दी जा रही है।
  • वर्तमान में प्रदेश के 6 जिलों में जमीनी स्तर पर सर्वे का काम शुरू हो चुका है। वहां ग्राम और क्षेत्रवार सर्वेक्षकों की नियुक्ति कर प्राचीन ग्रंथों को चिन्हित किया जा रहा है।

‘ज्ञानभारतम एप’ (Gyanbharatam App) का करें उपयोग

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रदेशवासियों से एक विशेष और भावुक अपील करते हुए कहा कि ज्ञान की इस प्राचीन धरोहर को बचाने में हर नागरिक की भूमिका अहम है।

उन्होंने कहा कि यदि किसी भी नागरिक के घर में कोई प्राचीन पांडुलिपि, हस्तलिखित ग्रंथ या ताड़पत्र सुरक्षित रखे हुए हैं, तो वे तुरंत उसे ज्ञानभारतम (Gyanbharatam) मोबाइल एप पर दर्ज करें। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि नागरिकों का यह छोटा सा सहयोग छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक नई और गौरवशाली पहचान दिलाएगा।