Dhamtari social boycott case: पेड़ काटने पर पंचायत का तुगलकी फरमान, पूरे परिवार का किया ‘हुक्का-पानी’ बंद

A conceptual image showing a distressed Indian family standing outside a village panchayat, representing the social boycott and plea for justice.

छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के धमतरी जिले से एक बेहद चौंकाने वाला और अमानवीय मामला सामने आया है। आधुनिक समाज में आज भी खाप पंचायतों जैसे तुगलकी फरमानों का खौफ किस कदर हावी है, यह ताज़ा ‘Dhamtari social boycott case’ (धमतरी सामाजिक बहिष्कार मामला) इसका जीता-जागता प्रमाण है। महज एक पेड़ काटने के मामूली विवाद पर गांव के दबंगों और स्थानीय पंचायत ने एक पूरे परिवार का ‘हुक्का-पानी’ बंद कर दिया है। पीड़ित परिवार अब दर-दर भटककर प्रशासन से न्याय (Justice) की गुहार लगा रहा है।

Dhamtari social boycott case: पेड़ काटने पर मिली खौफनाक सजा

प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार, यह पूरा विवाद गांव में एक पेड़ की कटाई को लेकर शुरू हुआ था। पंचायत ने इसे अपनी प्रतिष्ठा का सवाल बनाते हुए पीड़ित परिवार पर भारी-भरकम आर्थिक जुर्माना लगा दिया। जब परिवार ने इस अवैध जुर्माने का विरोध किया, तो इस ‘Dhamtari social boycott case’ ने एक गंभीर रूप ले लिया। पंचायत ने सरेआम फरमान जारी कर दिया कि गांव का कोई भी व्यक्ति इस परिवार से न तो बात करेगा, न ही उन्हें राशन या कोई अन्य बुनियादी सुविधा (Basic Amenities) दी जाएगी।

पीड़ित परिवार की न्याय की गुहार और पुलिस का दखल

सामाजिक बहिष्कार (Social Boycott) का दंश झेल रहे इस बेबस परिवार ने अंततः धमतरी जिला प्रशासन और पुलिस अधीक्षक (SP) के कार्यालय पहुंचकर न्याय की गुहार लगाई है। परिवार का आरोप है कि उन्हें गांव छोड़ने की धमकियां भी दी जा रही हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस विभाग (Police Department) ने इस घटना पर तत्काल संज्ञान लिया है।

पंचायत के अवैध फरमान पर होगी सख्त कानूनी कार्रवाई

प्रशासनिक अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी व्यक्ति या परिवार का सामाजिक बहिष्कार करना मानवाधिकारों (Human Rights) का घोर उल्लंघन और एक गंभीर कानूनी अपराध है। पुलिस ने चेतावनी दी है कि जांच में दोषी पाए जाने वाले पंचायत प्रतिनिधियों और गांव के दबंगों के खिलाफ तत्काल एफआईआर (FIR) दर्ज कर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।