छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के दुर्ग ज़िले में हुए बहुचर्चित अफ़ीम की खेती मामले में प्रशासन की तरफ़ से एक बड़ा अपडेट सामने आया है। ताज़ा Durg Opium Scandal (दुर्ग ओपियम स्कैंडल) अपडेट के अनुसार, राज्य शासन ने ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी एकता साहू का निलंबन रद्द करते हुए उन्हें दोबारा बहाल कर दिया है। न्यूज़ रिपोर्ट्स के मुताबिक़, ग्राम समोदा में मक्के की फ़सल की आड़ में चल रही अवैध अफ़ीम की खेती के मामले में भारी लापरवाही बरतने के आरोप में उन्हें सस्पेंड किया गया था। अब शासन के नए आदेश के बाद उन्हें धमधा (Dhamdha) ब्लॉक में नई ज़िम्मेदारी सौंपी गई है।
Durg Opium Scandal: ज़मीनी सर्वेक्षण (Survey) में लापरवाही का था आरोप
प्रशासन ने अधिकारी एकता साहू पर यह आरोप लगाया था कि उन्होंने अपने क्षेत्र के खेतों का ज़मीन पर जाकर सही तरीक़े से सर्वेक्षण नहीं किया था। सरकारी काग़ज़ों में जिस ज़मीन पर मक्के की फ़सल उगाई हुई दिखाई गई थी, असल में वहां बड़े पैमाने पर अफ़ीम (Opium) की खेती हो रही थी। छत्तीसगढ़ सिविल सेवा नियमों के सख़्त उल्लंघन के चलते उन पर यह निलंबन की कार्रवाई की गई थी। अब बहाली के बाद उन्हें वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारी कार्यालय, धमधा में पदस्थ किया गया है।
मक्के की आड़ में 8 करोड़ का काला सोना ज़ब्त (Seized)
ग़ौरतलब है कि दुर्ग पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीम ने जब ग्राम समोदा में छापा मारा था, तो ज़मीनी हक़ीक़त देखकर हर कोई दंग रह गया था। तक़रीबन 5 एकड़ ज़मीन पर अवैध अफ़ीम उगाई जा रही थी। मौक़े से क़रीब 8 करोड़ रुपये की क़ीमत की अफ़ीम और उसके पौधे ज़ब्त किए गए थे। प्रशासन ने सख़्त कार्रवाई करते हुए ट्रैक्टर चलवाकर पूरी अवैध फ़सल को मौक़े पर ही नष्ट कर दिया था।
मुख्य आरोपी (Accused) समेत 7 लोग सलाख़ों के पीछे
इस पूरे अवैध सिंडिकेट का भंडाफोड़ होने के बाद दुर्ग पुलिस ने सख़्त क़दम उठाए। इस हाई-प्रोफ़ाइल मामले में अब तक मुख्य आरोपी और स्थानीय नेता विनायक ताम्रकार समेत उनके सहयोगियों को मिलाकर कुल 7 लोगों को गिरफ़्तार कर जेल भेजा जा चुका है।
