रायपुर. छत्तीसगढ़ शासन ने संपत्ति पंजीयन और मूल्यांकन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और यथार्थपरक बनाने के लिए दुर्ग और सरगुजा जिले की संशोधित गाइडलाइन दरों को मंजूरी दे दी है। केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड द्वारा अनुमोदित ये नई दरें 2 मार्च 2026 से प्रभावशील हो जाएंगी। राज्य में इससे पहले 20 नवंबर 2025 को नवीन गाइडलाइन दरें लागू की गई थीं। इसके बाद शासन ने आवश्यकता के अनुसार दरों के पुनरीक्षण के लिए सभी जिला मूल्यांकन समितियों को अपने प्रस्ताव प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे।
शासन के इन्हीं निर्देशों का पालन करते हुए दुर्ग और सरगुजा जिले की समितियों ने संशोधित दरों के प्रस्ताव तैयार कर भेजे थे। इन प्रस्तावों पर विचार-विमर्श करने के लिए महानिरीक्षक पंजीयन की अध्यक्षता में केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड की 1 अहम बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में 2 जिलों से प्राप्त प्रस्तावित गाइडलाइन दरों का विस्तृत परीक्षण और गहन समीक्षा की गई। समग्र चर्चा के बाद बोर्ड ने 2 जिलों के लिए संशोधित दरों को अपनी अंतिम स्वीकृति प्रदान कर दी है।
- केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड द्वारा स्वीकृत नई गाइडलाइन दरें 2 मार्च 2026 से दुर्ग और सरगुजा जिले में पूरी तरह से लागू हो जाएंगी।
- महानिरीक्षक पंजीयन की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में 2 जिलों से प्राप्त प्रस्तावों का परीक्षण कर अंतिम मुहर लगाई गई।
- इससे पूर्व राज्य सरकार ने 20 नवंबर 2025 को पूरे प्रदेश में नई गाइडलाइन दरें लागू करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया था।
- नई दरों के लागू होने से रियल एस्टेट कारोबारियों, आम नागरिकों और अन्य हितधारकों को संपत्ति लेन-देन में स्पष्टता मिलेगी।
- शासन द्वारा अब तक प्रदेश के सभी 33 जिलों के लिए पुनरीक्षित गाइडलाइन दरें जारी कर दी गई हैं, जिससे राजस्व व्यवस्था मजबूत होगी।
नई गाइडलाइन दरों के लागू होने से संपत्ति के मूल्य निर्धारण की प्रक्रिया अधिक सुव्यवस्थित और बाजार के अनुकूल होने की उम्मीद है। इस बदलाव से जमीन या मकान खरीदने और बेचने वालों को अद्यतन दरों के आधार पर लेन-देन करने में सुविधा मिलेगी। शासन का मुख्य उद्देश्य पंजीयन प्रक्रिया में पूरी तरह से पारदर्शिता लाना और बाजार दरों के अनुरूप यथार्थ मूल्यांकन सुनिश्चित करना है। आम नागरिक इन नई दरों की विस्तृत और सटीक जानकारी संबंधित जिला पंजीयन कार्यालयों या विभाग की आधिकारिक वेबसाइट से आसानी से प्राप्त कर सकते हैं। शासन का मानना है कि इस नई पहल से न केवल संपत्ति लेन-देन में होने वाले विवाद कम होंगे, बल्कि राज्य के राजस्व संग्रहण तंत्र को भी 1 नई मजबूती मिलेगी। राज्य सरकार की इस पारदर्शी कार्यप्रणाली से छत्तीसगढ़ में रियल एस्टेट सेक्टर को 1 सकारात्मक दिशा प्राप्त होगी।
