अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति (Energy Supply) को बुरी तरह से प्रभावित कर दिया है, जिसका सीधा असर अब भारत के घरेलू उद्योगों पर साफ दिखाई दे रहा है। दरअसल, देश में इस समय गैस का भारी संकट पैदा हो गया है। सरकार ने एलपीजी (LPG) और एलएनजी (LNG) की सप्लाई फैक्ट्रियों से हटाकर घरेलू उपभोक्ताओं की ओर मोड़ दी है। इसका सबसे खतरनाक परिणाम 400 साल पुरानी Firozabad Glass Industry (फिरोजाबाद कांच उद्योग) पर पड़ा है, जो अब पूरी तरह से ठप होने की कगार पर पहुंच गई है।
Firozabad Glass Industry: 200 कारखाने खतरे में, उत्पादन हुआ आधा
उत्तर प्रदेश का फिरोजाबाद शहर पूरे देश में कांच उत्पादन का मुख्य केंद्र है। यहां के कारखाने और कांच पिघलाने वाली भट्टियां पूरी तरह से नेचुरल गैस (Natural Gas) पर ही निर्भर हैं। इन भट्टियों को 1500°C के उच्च तापमान पर लगातार चलाना पड़ता है। अगर गैस की कमी से ये भट्टियां ठंडी पड़ गईं, तो इन्हें दोबारा चालू करने में हफ्तों का समय और अरबों रुपये का भारी खर्च आता है।
वर्तमान स्थिति बेहद चिंताजनक है:
- गैस की कमी के कारण यहां के लगभग 200 छोटे और मध्यम कारखानों का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है।
- कई फैक्ट्रियों ने अपना उत्पादन घटाकर सीधा 50% तक कर दिया है या पूरी तरह बंद कर दिया है।
- कांच की बोतलों और जार की कीमतों में 20% तक का भारी उछाल आ गया है।
परिणाम स्वरूप, कई कंपनियों ने नए ऑर्डर लेना पूरी तरह से बंद कर दिया है और अपनी विस्तार योजनाओं को फिलहाल के लिए टाल दिया है।
दवा, शराब और FMCG सेक्टर पर चौतरफा मार
कांच की इस भारी कमी का असर सिर्फ बोतलों तक ही सीमित नहीं है। इसका सीधा असर हर उस सेक्टर पर पड़ रहा है जो कांच की पैकेजिंग का इस्तेमाल करता है।
- गर्मियों के सीजन में कोल्ड ड्रिंक और प्रीमियम ड्रिंक्स बनाने वाली कंपनियों को कांच की बोतलें (फ्लास्क) ही नहीं मिल पा रही हैं।
- इसके अलावा दवाइयों की शीशियां, कॉस्मेटिक पैकेजिंग, दूध की बोतलें और जैम के जार की सप्लाई भी बुरी तरह प्रभावित हुई है।
पैकेजिंग लागत (Packaging Cost) में अचानक 30% तक की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। एस आर ग्लास के प्रबंध निदेशक प्रांजल मित्तल के अनुसार, “अगर युद्ध एक सप्ताह भी बढ़ता है, तो हमारा पूरा कारोबार अगले चार महीनों के लिए गड़बड़ा जाता है।”
क्यों भारत के लिए बड़ा झटका है यह गैस संकट?
भारत अपनी प्राकृतिक गैस की जरूरतों का लगभग 50% हिस्सा दूसरे देशों से आयात करता है। इसके अलावा, एलएनजी (LNG) का 40% केवल कतर से और एलपीजी (LPG) का 90% हिस्सा मिडिल-ईस्ट से आता है। यही वजह है कि मध्य पूर्व के संकट का सीधा असर भारत पर हो रहा है।
निष्कर्ष के तौर पर, हालांकि सीजफायर की घोषणा हो चुकी है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि हालात जल्द सामान्य नहीं होंगे। अगर जल्द ही कोई ठोस समाधान नहीं निकला, तो न केवल Firozabad Glass Industry के हजारों कामगारों की रोजी-रोटी छिनेगी, बल्कि पूरे देश में महंगाई का एक नया दौर भी शुरू हो सकता है।
