केंद्र सरकार के महत्वाकांक्षी विनिवेश (Disinvestment) कार्यक्रम को एक बड़ा झटका लग सकता है। बहुचर्चित आईडीबीआई बैंक (IDBI Bank) की बिक्री प्रक्रिया फिलहाल खटाई में पड़ती नजर आ रही है। ताज़ा व्यावसायिक रिपोर्ट्स और सूत्रों के अनुसार, ‘IDBI Bank bids’ (आईडीबीआई बैंक की बोलियां) सरकार द्वारा तय किए गए न्यूनतम रिजर्व प्राइस (Reserve Price) से काफी नीचे रहने की संभावना है। इस आर्थिक स्थिति को देखते हुए यह माना जा रहा है कि सरकार फिलहाल इस बड़े बिक्री सौदे (Stake Sale) को टाल सकती है।
IDBI Bank bids: रिजर्व प्राइस से कम रह सकते हैं प्रस्ताव
आईडीबीआई बैंक के निजीकरण (Privatization) को लेकर लंबे समय से कयास लगाए जा रहे थे। हालांकि, संभावित खरीदारों (Bidders) द्वारा किए गए हालिया मूल्यांकन ने सरकार की चिंताएं बढ़ा दी हैं। ताज़ा ‘IDBI Bank bids’ की स्थिति यह दर्शाती है कि निवेशकों ने बैंक की संपत्तियों (Assets) और भविष्य की देनदारियों का जो आकलन किया है, वह सरकार की न्यूनतम उम्मीदों से बिल्कुल मेल नहीं खा रहा है। सरकार अपनी बहुमूल्य हिस्सेदारी को सस्ते दाम पर बेचने के पक्ष में नहीं है।
विनिवेश सौदे (Disinvestment Transaction) पर लटकी तलवार
वित्तीय विशेषज्ञों (Financial Experts) का स्पष्ट मानना है कि यदि अंतिम बोलियां तय मानक से नीचे रहती हैं, तो इस सौदे के आगे बढ़ने की संभावना न के बराबर है। ऐसे में, निवेश और लोक संपत्ति प्रबंधन विभाग (DIPAM) और वित्त मंत्रालय इस पूरी विनिवेश प्रक्रिया की फिर से गहन समीक्षा कर सकते हैं या इसे अगले वित्तीय वर्ष तक के लिए ठंडे बस्ते में डाल सकते हैं।
शेयरधारकों (Shareholders) और बाजार पर असर
इस खबर के बाहर आते ही शेयर बाजार (Stock Market) में आईडीबीआई बैंक के शेयरों पर सीधा असर देखने को मिल रहा है। विनिवेश टलने की आशंका से खुदरा निवेशकों (Retail Investors) के बीच भारी अनिश्चितता का माहौल है। अब सभी की निगाहें सरकार के आधिकारिक फैसले पर टिकी हैं।
