ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई की हवाई हमले में मौत, बेटे मोजतबा ने संभाली कमान

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नई दिल्ली. ईरान की राजधानी तेहरान पर शनिवार तड़के हुए 1 भीषण अमेरिकी-इजरायली हवाई हमले में ईरान के 86 वर्षीय सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत हो गई है। ईरान के सरकारी मीडिया और वहां की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने सरकारी टेलीविजन चैनलों पर इस बड़ी घटना की आधिकारिक पुष्टि कर दी है। सरकारी बयान में बताया गया है कि यह जानलेवा हमला उस वक्त हुआ जब खामेनेई अपने दफ्तर में कामकाज में व्यस्त थे। इस हमले में उनके आधिकारिक आवास को पूरी तरह से निशाना बनाया गया, जिसमें खामेनेई के साथ-साथ उनकी बेटी और 1 पोते की भी जान चली गई है। इस अपूरणीय क्षति के बाद पूरे ईरान में 40 दिनों के राष्ट्रीय शोक का ऐलान किया गया है। खामेनेई की मौत के बाद मध्य पूर्व में तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है और सामने आ रही मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उनके बेटे मोजतबा खामेनेई ने अब देश और सत्ता की कमान अपने हाथों में ले ली है।

  • अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सबसे पहले शनिवार देर रात अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत की जानकारी साझा की थी।
  • इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजमिन नेतन्याहू ने भी इस बात की पुष्टि की है कि तेहरान स्थित खामेनेई का आवास 1 अचानक और बेहद शक्तिशाली हमले में पूरी तरह तबाह हो गया।
  • इस हमले के तुरंत बाद ईरान ने भयंकर जवाबी कार्रवाई करते हुए इजरायल और 4 खाड़ी अरब देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर बड़े हमले शुरू कर दिए हैं।
  • ईरान द्वारा अमेरिका के जिन बड़े मिलिट्री बेस को प्रमुखता से निशाना बनाया गया है, वे मुख्य रूप से बहरीन, कुवैत और कतर जैसे देशों में मौजूद हैं।
  • खामेनेई पिछले 3 दशकों से अधिक समय से ईरान के सर्वोच्च नेता थे और उनकी मौत से मध्य पूर्व की भू-राजनीति में 1 बड़ा और व्यापक बदलाव आना तय माना जा रहा है।

अमेरिका और इजरायल द्वारा शनिवार को किए गए इस बड़े पैमाने के संयुक्त हमले के बाद से खाड़ी क्षेत्र में युद्ध के हालात और अधिक गंभीर और चिंताजनक हो गए हैं। इस शक्तिशाली हवाई हमले ने न केवल ईरान के शीर्ष राजनीतिक और धार्मिक नेतृत्व को खत्म कर दिया है, बल्कि इन देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव को 1 सीधे और विनाशकारी सैन्य संघर्ष में तब्दील कर दिया है। मोजतबा खामेनेई के अचानक सत्ता संभालने के बाद अब यह देखना अत्यंत अहम होगा कि ईरान का नया नेतृत्व अमेरिका और इजरायल के खिलाफ किस तरह की आक्रामक या रणनीतिक प्रतिक्रिया देता है। वर्तमान हालातों और युद्ध की गंभीरता को देखते हुए दुनियाभर के तमाम शक्तिशाली देश इस बढ़ते संघर्ष को जल्द से जल्द शांत करने की कूटनीतिक कोशिशों में जुट गए हैं। दरअसल ईरान की जवाबी कार्रवाई और 400 से अधिक मिसाइलों के दागे जाने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और क्षेत्रीय सुरक्षा पर 1 बहुत बड़ा संकट खड़ा हो गया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस बात को लेकर बेहद चिंतित है कि अगर यह युद्ध इसी तेजी से भड़कता रहा, तो इसमें मध्य पूर्व के कई और देश भी सीधे तौर पर शामिल हो सकते हैं, जिससे विश्व स्तर पर 1 अभूतपूर्व और भयावह मानवीय संकट पैदा हो जाएगा।