आखिरी चेतावनी: ईरान की धमकी के बाद होर्मुज से पीछे हटा अमेरिकी जंगी जहाज

समुद्र में अमेरिकी जंगी जहाज और आसमान में मिसाइल का प्रतीकात्मक चित्र

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव फिर से गहरा गया है। पाकिस्तान के इस्लामाबाद में हुई 21 घंटे की ऐतिहासिक शांति वार्ता विफल होने के बाद दोनों देशों के बीच 1 बार फिर युद्ध का खतरा मंडराने लगा है। फिलहाल 14 दिनों का नाजुक युद्धविराम लागू है, लेकिन ईरान और अमेरिका के आक्रामक रुख को देखते हुए हालात कभी भी बिगड़ सकते हैं।

30 मिनट में पीछे हटने पर मजबूर हुआ अमेरिकी जहाज

ईरान ने रविवार को दावा किया कि उसने रणनीतिक रूप से अहम होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) में 1 अमेरिकी जंगी जहाज को खदेड़ दिया है।

दरअसल, अमेरिका ने होर्मुज में ईरान द्वारा बिछाई गई बारूदी सुरंगों को हटाने के लिए अपने जंगी जहाज भेजे थे, जिस पर ईरान भड़क गया।

  • ईरान के सरकारी ब्रॉडकास्टर ‘प्रेस टीवी’ के अनुसार, ईरानी सेना की क्रूज मिसाइलों ने अमेरिकी विध्वंसक जहाजों को लगभग अपना निशाना बना लिया था।
  • आसमान में हमलावर ड्रोन भी तैनात कर दिए गए थे।
  • ईरानी सेना ने अमेरिकी जहाज को सीधे तौर पर चेतावनी देते हुए कहा कि यह आखिरी वॉर्निंग है, अगर जहाज पीछे नहीं हटा तो वे हमला कर देंगे।
  • इस कड़ी चेतावनी के बाद अमेरिकी नौसेना के जहाज को 30 मिनट की समय-सीमा के भीतर वहां से भागने पर मजबूर होना पड़ा।

ट्रंप की चेतावनी: ‘ईरान को टोल चुकाने वाले जहाजों को रोकेंगे’

इस घटना के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कड़ा बयान सामने आया है। ट्रंप ने कहा कि शांति वार्ता बिना किसी समझौते के समाप्त होने के बाद, अमेरिकी नौसेना होर्मुज में जहाजों के प्रवेश या निकास को रोकने के लिए तत्काल नाकेबंदी शुरू करेगी।

उन्होंने नौसेना को स्पष्ट निर्देश दिया है कि अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में ईरान को ‘अवैध टोल’ (शुल्क) चुकाने वाले प्रत्येक जहाज की तलाश की जाए और उसे रोका जाए। ट्रंप ने सख्त लहजे में कहा कि अमेरिका उपयुक्त समय पर ईरान को खत्म करने के लिए पूरी तरह से तैयार है।

क्यों विफल हुई 21 घंटे की इस्लामाबाद वार्ता?

इस्लामाबाद में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस कर रहे थे। दोनों पक्ष वार्ता विफल होने के लिए 1-दूसरे को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।

जेडी वेंस ने बताया कि अमेरिका ने अपना अंतिम और सर्वोत्तम प्रस्ताव दिया था, लेकिन ईरान ने युद्ध समाप्ति के लिए वाशिंगटन की शर्तें स्वीकार नहीं कीं। अमेरिकी उपराष्ट्रपति के अनुसार, शांति समझौता न हो पाने का मुख्य कारण तेहरान का अपने परमाणु कार्यक्रम को छोड़ने से साफ इनकार करना था।