छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) की राजनीति में एक बेहद ताज़ा और बड़ी हलचल मची हुई है। 23 साल पुराने और बहुचर्चित राम अवतार जग्गी हत्याकांड (Jaggi Murder Case) में पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी को उम्रक़ैद की सज़ा मिल चुकी है। न्यूज़ रिपोर्ट्स के मुताबिक़, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के इस सख़्त आदेश के ख़िलाफ़ आज सुप्रीम कोर्ट में एक अहम सुनवाई होनी है। सियासी बाज़ार में रोज़ इस बात की तेज़ चर्चा है कि क्या सुप्रीम कोर्ट से जूनियर जोगी को कोई राहत मिलेगी या उन्हें जेल जाना पड़ेगा।
हाईकोर्ट (High Court) का ऐतिहासिक फ़ैसला
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार वर्मा की खंडपीठ ने ट्रायल कोर्ट के आदेश को पलटते हुए यह बड़ा फ़ैसला सुनाया है। अदालत ने माना कि जिन पुख़्ता सबूतों के आधार पर अन्य 28 आरोपियों को सज़ा मिली, उन्हें अमित जोगी के मामले में पूरी तरह नज़रअंदाज़ किया गया था। इस सख़्त आदेश के बाद अमित जोगी को आईपीसी की धारा 120-बी और 302/34 के तहत हत्या की साज़िश रचने का मुख्य दोषी माना गया है।
सीबीआई (CBI) के पुख़्ता सबूतों पर ज़्यादा ज़ोर
ग़ौरतलब है कि 4 जून 2003 को रायपुर में एनसीपी नेता राम अवतार जग्गी की सरेआम हत्या कर दी गई थी। सीबीआई जांच में यह साफ़ हुआ कि 10 जून 2003 की एनसीपी रैली को रोकने के लिए यह ख़तरनाक साज़िश रची गई थी। गवाह रेजिनल्ड जेरेमियाह के बयान और कॉल डिटेल्स पर ज़्यादा ज़ोर दिया गया, जिससे यह साबित हुआ कि सीएम हाउस और होटल ग्रीन पार्क में हत्या की ख़ास योजना बनी थी।
सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) का अहम क़दम
अब पूरे राज्य की नज़रें देश की सर्वोच्च अदालत के अगले क़दम पर टिकी हैं। अगर आज सुप्रीम कोर्ट से अमित जोगी को राहत नहीं मिलती है, तो उनका जेल जाना बिल्कुल तय है। यह क़ानूनी कार्रवाई जोगी कांग्रेस (JCCJ) के राजनीतिक भविष्य और उनकी पारिवारिक विरासत के लिए एक ‘करो या मरो’ की सख़्त स्थिति बन गई है।
