नई दिल्ली. दक्षिण भारत के अहम राज्य केरल का नाम आधिकारिक तौर पर बदलकर ‘केरलम’ किया जाएगा। केंद्र सरकार ने इस ऐतिहासिक बदलाव को अपनी मंज़ूरी दे दी है। यह अहम फ़ैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नए कार्यालय ‘सेवा तीर्थ’ में आयोजित पहली कैबिनेट बैठक के दौरान लिया गया। राज्य के नाम परिवर्तन के अलावा, प्रधानमंत्री के नेतृत्व में हुई इस कैबिनेट बैठक में देश भर के लिए कुल 12,236 करोड़ रुपये की विभिन्न विकास परियोजनाओं को भी हरी झंडी दिखाई गई है।
केरल का नाम बदलने की यह मांग राज्य में लंबे समय से उठ रही थी। स्थानीय नागरिकों और राज्य सरकार का स्पष्ट तर्क रहा है कि मलयालम भाषा में राज्य को ‘केरलम’ ही पुकारा जाता है, इसलिए इसका आधिकारिक नाम भी यही होना चाहिए। इस जनभावना को देखते हुए केरल विधानसभा पहले ही नाम परिवर्तन का प्रस्ताव पारित कर चुकी है। मई महीने में राज्य में प्रस्तावित विधानसभा चुनावों से ठीक पहले केंद्र सरकार के इस कदम ने स्थानीय राजनीति में भी एक नई हलचल पैदा कर दी है।
‘सेवा तीर्थ’ में हुई इस अहम कैबिनेट बैठक में नाम परिवर्तन के साथ-साथ बुनियादी ढांचे और कृषि से जुड़े कई बड़े फैसले भी लिए गए, जिनमें से पांच प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं:
- रेलवे के विस्तार के लिए गोंदिया-जबलपुर लाइन के दोहरीकरण हेतु 5236 करोड़ रुपये और पुनारख-किऊल की तीसरी-चौथी रेल लाइन के लिए 2668 करोड़ रुपये मंजूर किए गए।
- झारखंड और आसपास के क्षेत्रों में गम्हरिया-चांडिल की तीसरी-चौथी रेल लाइन परियोजना को 1168 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिली।
- नागरिक उड्डयन क्षेत्र में बड़ा कदम उठाते हुए श्रीनगर में एक नया इंटीग्रेटेड एयरपोर्ट टर्मिनल बनाने के लिए 1667 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए।
- शहरी परिवहन को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से अहमदाबाद मेट्रो के फेज़ 2B के विस्तार के लिए 1067 करोड़ रुपये की मंज़ूरी दी गई।
- कृषि और ऊर्जा क्षेत्र में सुधार करते हुए कच्चे जूट की एमएसपी के लिए 430 करोड़ रुपये तथा पॉवर सेक्टर में रिफॉर्म्स को मंज़ूरी प्रदान की गई है।
संवैधानिक प्रक्रिया के तहत, केंद्रीय कैबिनेट की मंज़ूरी मिलने के बाद अब ‘केरल (नाम में बदलाव) बिल, 2026’ की आगे की प्रक्रिया शुरू होगी। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 3 के अनुसार, राष्ट्रपति इस विधेयक को औपचारिक राय जानने के लिए केरल विधानसभा के पास भेजेंगी। विधानसभा से आवश्यक राय प्राप्त होने के उपरांत केंद्र सरकार इस बिल को संसद में पेश करेगी। संसद से इस विधेयक के विधिवत पारित होने के बाद ही राज्य का नाम आधिकारिक और कानूनी तौर पर बदलकर ‘केरलम’ हो जाएगा। इस कदम को राज्य की भाषाई और सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता देने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
