महासमुंद: 25 लाख के इनामी विकास समेत 15 नक्सलियों ने पुलिस के सामने किया सरेंडर

Weapons and ammunition recovered by security forces after a fierce Naxal encounter in Chhattisgarh.

महासमुंद: छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में सुरक्षाबलों और पुलिस को नक्सल विरोधी अभियान में 1 बड़ी और ऐतिहासिक सफलता हाथ लगी है। राज्य सरकार की पुनर्वास नीति और मुख्यधारा में लौटने की अपील से प्रभावित होकर बी.बी.एम. (बलांगीर-बरगढ़-महासमुंद) डिवीजन कमेटी के 15 इनामी माओवादियों ने 1 साथ पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया है। इन सभी माओवादियों ने देर रात महासमुंद के बलौदा थाने पहुंचकर पुलिस अधिकारियों के सामने अपने हथियार डाल दिए और हिंसा का रास्ता हमेशा के लिए छोड़ने का संकल्प लिया। आत्मसमर्पण करने वाले इन नक्सलियों में ओडिशा के पश्चिम सब जोनल ब्यूरो के सचिव विकास उर्फ सुदर्शन का नाम सबसे प्रमुख है, जिस पर प्रशासन ने 25 लाख रुपये का बड़ा इनाम घोषित कर रखा था। महासमुंद पुलिस अधीक्षक प्रभात कुमार ने इस बड़े आत्मसमर्पण की आधिकारिक पुष्टि की है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इन माओवादियों का हृदय परिवर्तन कराने में महासमुंद और ओडिशा पुलिस के संयुक्त और अथक प्रयास शामिल हैं। सरेंडर करने से पहले इन नक्सलियों की 1 विशेष प्रतिनिधिमंडल के साथ गहन बातचीत हुई थी, जिसमें उन्हें हिंसा के नुकसान और शांतिपूर्ण जीवन के लाभों के बारे में समझाया गया था। इसी बातचीत के सकारात्मक परिणाम स्वरूप इन 15 इनामी नक्सलियों ने समाज की मुख्यधारा में लौटने का अंतिम निर्णय लिया।

  • आत्मसमर्पण करने वाले 15 माओवादियों के इस समूह में 9 महिला और 6 पुरुष नक्सली शामिल हैं, जो लंबे समय से बी.बी.एम. डिवीजन में सक्रिय थे।
  • इन नक्सलियों का नेतृत्व कर रहे विकास उर्फ सुदर्शन पर 25 लाख रुपये का भारी-भरकम इनाम था, जिसका सरेंडर सुरक्षाबलों के लिए 1 बड़ी सामरिक जीत मानी जा रही है।
  • सभी 15 नक्सलियों ने देर रात महासमुंद जिले के बलौदा पुलिस थाने में अपने आधुनिक हथियारों के साथ आत्मसमर्पण की आधिकारिक प्रक्रिया पूरी की।
  • पुलिस अधीक्षक प्रभात कुमार के अनुसार, सरेंडर करने वाले इन नक्सलियों को पहले से मुख्यधारा में लौट चुके अपने पुराने साथियों का शांतिपूर्ण जीवन देखकर प्रेरणा मिली है।
  • आत्मसमर्पण करने वाले सभी नक्सलियों को अब छत्तीसगढ़ सरकार की लाभकारी नक्सल पुनर्वास नीति के तहत रोजगार और जीवन यापन की पूरी सहायता प्रदान की जाएगी।

पुलिस विभाग के उच्चाधिकारियों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में और इतने बड़े इनामी नक्सली का 1 साथ सरेंडर करना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में अब वैचारिक और जमीनी स्तर पर बड़े बदलाव आ रहे हैं। प्रशासन की ओर से लगातार यह प्रयास किया जा रहा है कि जो भी युवा भटकर माओवादी संगठन का हिस्सा बन गए हैं, वे हिंसा छोड़कर वापस अपने घर लौट आएं। आत्मसमर्पण कर चुके इन सभी 15 लोगों को शासन की पुनर्वास नीति का पूरा लाभ दिया जाएगा, ताकि वे बिना किसी भय के 1 सामान्य और सम्मानजनक नागरिक का जीवन व्यतीत कर सकें। फिलहाल महासमुंद पुलिस इनके सरेंडर से जुड़ी विस्तृत कानूनी कागजी कार्रवाई पूरी करने में जुटी हुई है और इनसे पूछताछ कर संगठन की अन्य आंतरिक गतिविधियों के बारे में भी अहम खुफिया जानकारी जुटाई जा रही है। इस घटनाक्रम से ओडिशा और छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय माओवादी कैडरों का मनोबल टूटने और आने वाले समय में कुछ और बड़े सरेंडर होने की प्रबल संभावना बन गई है।