छत्तीसगढ़ राज्य महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक और स्वर्णिम अध्याय की शुरुआत कर रहा है। प्रदेश की मातृशक्ति के सम्मान, सुरक्षा और सर्वांगीण विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए राज्य सरकार ने इस वर्ष को ‘महतारी गौरव वर्ष’ (Mahatari Gaurav Varsh) के रूप में मनाने का संकल्प लिया है। ‘Mahatari Gaurav Varsh Chhattisgarh’ की यह विशेष पहल राज्य की महिलाओं को आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक रूप से सुदृढ़ बनाने के एक नए युग का प्रतीक है।
Mahatari Gaurav Varsh Chhattisgarh: आर्थिक स्वतंत्रता पर जोर
जनसंपर्क विभाग (DPRCG) द्वारा जारी एक विशेष आलेख के अनुसार, राज्य सरकार ने महिलाओं को सीधे तौर पर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई क्रांतिकारी कदम उठाए हैं।
इनमें ‘महतारी वंदन योजना’ (Mahtari Vandan Yojana) सबसे प्रमुख है, जिसके तहत राज्य की लाखों विवाहित महिलाओं को प्रतिमाह 1,000 रुपये (सालाना 12,000 रुपये) की सम्मान राशि सीधे उनके बैंक खातों (DBT) में प्रदान की जा रही है। इसके साथ ही ‘लखपति दीदी’ योजना और स्व-सहायता समूहों (SHGs) के जरिए महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ा जा रहा है, ताकि वे अपने परिवार का मजबूत आर्थिक आधार बन सकें।
शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा के नए मापदंड
इस विशेष गौरव वर्ष के दौरान सरकार का ध्यान केवल आर्थिक मदद तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं के स्वास्थ्य, पोषण और उच्च शिक्षा पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। प्रदेश भर में महिलाओं के लिए सुरक्षित कार्य-माहौल तैयार करने, उन्हें उनके कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक करने और व्यावसायिक कौशल (Vocational Training) देने के लिए वृहद स्तर पर अभियान चलाए जा रहे हैं।
‘विकसित छत्तीसगढ़’ में मातृशक्ति की सक्रिय भागीदारी
मुख्यमंत्री और राज्य सरकार का स्पष्ट मानना है कि बिना महिलाओं की सक्रिय भागीदारी के ‘विकसित छत्तीसगढ़’ का विजन अधूरा है। आज प्रदेश की महिलाएं कृषि, तकनीकी, हस्तशिल्प और प्रशासनिक क्षेत्रों में अपनी नेतृत्व क्षमता का लोहा मनवा रही हैं। यह पहल महिलाओं के अदम्य साहस और उनके द्वारा रचे जा रहे नए इतिहास का एक सच्चा सम्मान है।
