भारत के सुरक्षा बलों को नक्सलवाद के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी सफलता हाथ लगी है। दशकों से सुरक्षा एजेंसियों के लिए सिरदर्द बने और सीपीआई (माओवादी) के पूर्व महासचिव के ‘Maoist leader Ganapati arrested’ होने की बड़ी खबर सामने आई है। कुख्यात नक्सली मास्टरमाइंड और पोलित ब्यूरो सदस्य गणपति (मुप्पला लक्ष्मण राव) को पड़ोसी देश नेपाल में गिरफ्तार कर लिया गया है, जो भारत में नक्सल आंदोलन के लिए एक बहुत बड़ा झटका है।
नेपाल में कैसे बिछाया गया खुफिया जाल?
सूत्रों के अनुसार, तेलंगाना पुलिस और केंद्रीय खुफिया एजेंसियों के एक बेहद गुप्त और संयुक्त ऑपरेशन के तहत नेपाल में छिपे इस खूंखार नक्सली नेता को ट्रैक किया गया। मुप्पला लक्ष्मण राव उर्फ गणपति लंबे समय से पुलिस की रडार से बाहर था और उसने नेपाल को अपना सुरक्षित ठिकाना बना रखा था। सुरक्षा बलों ने तकनीकी सर्विलांस और ‘ह्यूमन इंटेलिजेंस’ के बेहतरीन समन्वय से उसकी सटीक लोकेशन का पता लगाया। यह गिरफ्तारी ‘ऑपरेशन कगार’ और वामपंथी उग्रवाद (LWE) को खत्म करने के सरकार के संकल्प की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।
सीपीआई (माओवादी) का ‘ब्रेन’ था गणपति
गणपति केवल एक कमांडर ही नहीं, बल्कि माओवादी संगठन का मुख्य रणनीतिकार और पोलित ब्यूरो का सबसे अहम सदस्य था। वह भारत के ‘रेड कॉरिडोर’ में हुए कई बड़े और घातक नक्सली हमलों का मास्टरमाइंड रहा है। उसके ही इशारों पर छत्तीसगढ़ के बस्तर, झारखंड और महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में अनगिनत हिंसक घटनाओं को अंजाम दिया गया। बढ़ती उम्र और खराब स्वास्थ्य के कारण उसके सरेंडर की अटकलें लगाई जा रही थीं, लेकिन अंततः उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
भारत में नक्सलवाद के अंत की शुरुआत
गणपति की यह हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारी देश में नक्सल नेटवर्क की कमर टूटने का स्पष्ट संकेत है। गृह मंत्रालय और सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इस ‘Maoist leader Ganapati arrested’ होने की घटना के बाद नक्सली कैडर का मनोबल पूरी तरह टूट जाएगा। इससे संगठन में नेतृत्व का भारी संकट पैदा होगा, जिससे आने वाले दिनों में और भी कई बड़े सरेंडर देखने को मिल सकते हैं।
