MH-KA Border Issue: Deepened border dispute between Karnataka and Maharashtra, Marathi sign board removed in Belagavi, Karnataka, granddaughter ink on hoardings| national News in Hindi

इंटरनेट डेस्क। कर्नाटक और महाराष्ट्र के बीच सीमा विवाद का मुद्दा गहराता जा रहा है। आज शनिवार को कर्नाटक के बेलगावी में कर्नाटक समर्थक कार्यकर्ताओं ने मराठी भाषा में लिखे गए साइन बोर्ड और होर्डिंग्स को हटा दिया वहीं कुछ पर काली स्याही पोत दी। दोनों राज्यों के बीच बेलगावी को लेकर सीमा विवाद लगातार बढ़ रहा है।

एएनआई की एक रिपोर्ट के अऩुसार, आज शनिवार को कर्नाटका रक्षणा वेदिक संगठन के कार्यकर्ताओं ने बेलगावी में कई दुकानों के बाहर मराठी में लगे होर्डिंग्स पर स्याही पोत दी। वहीं मराठी भाषा के साइन बोर्ड को वहां से हटा दिया। कार्यकर्ताओं ने इस संबंध में कहा कि मराठी भाषा को राज्य में ज्यादा बढ़ावा दिया जा रहा है ये हमारी कन्नड़ संस्कृति के खिलाफ हैं। हम इसका विरोध करते रहेंगे।

 

Karnataka: Karnataka Rakshana Vedike activists blackened and removed signages and hoardings in Marathi language in Belagavi, yesterday. pic.twitter.com/b29zUCJpCT
— ANI (@ANI) March 13, 2021

क्या है विवाद

दोनों राज्यों के बीच में बेलगावी, खानापुर, निप्पानी, नंदगाड और कारवार (उत्तरी कन्नड़ ज़िले) की सीमा को लेकर विवाद है। साल 1956 में भाषाई आधार राज्यों के पुनर्गठन के दौरान महाराष्ट्र के कुछ नेताओं ने मराठी भाषी बेलगावी सिटी, खानापुर, निप्पानी, नांदगाड और कारवार को महाराष्ट्र का हिस्सा बनाने की मांग की थी।

जब मामला बढ़ा तो केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश मेहर चंद महाजन के नेतृत्व में एक आयोग के गठन का फ़ैसला लिया। मेहर चंद महाजन ने भारत में जम्मू कश्मीर के विलय में अहम भूमिका निभाई थी।

इसको लेकर कर्नाटक में विवाद शुरू हो गया। कर्नाटक को तब मैसूर कहा जाता था। विवाद इसलिए शुरू हुआ था क्योंकि मैसूर के तत्कालीन मुख्यमंत्री एस. निजालिंग्पा, प्रधानमंत्री इंदिरा गांदी और महाराष्ट्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री वीपी नाइक के साथ बैठक में इसके लिए तैयार हो गए थे।

 

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