मूडीज की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, मध्य पूर्व का यह भीषण युद्ध यदि जल्द शांत नहीं होता है, तो इसका सबसे बुरा असर एशिया की उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ेगा। इस ‘Middle East conflict impact’ के कारण वैश्विक व्यापार और सप्लाई चेन (Supply Chain) बुरी तरह से बाधित हो रही है। लाल सागर और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसे प्रमुख समुद्री मार्गों पर मंडराते सैन्य खतरे के कारण शिपिंग कंपनियों की माल ढुलाई लागत (Freight Costs) और इंश्योरेंस प्रीमियम में भारी इजाफा हो गया है।
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और महंगाई का खतरा
इस संकट का सबसे बड़ा और सीधा आर्थिक प्रभाव कच्चे तेल (Crude Oil) की अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर देखने को मिल रहा है। भारत अपनी कुल ऊर्जा जरूरतों का लगभग 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सा आयात करता है।
मूडीज ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि तेल की कीमतों में लगातार हो रही वृद्धि से भारत का आयात बिल (Import Bill) तेजी से बढ़ेगा। इसके परिणामस्वरूप, घरेलू बाजार में पेट्रोल, डीजल और गैस के दाम बढ़ सकते हैं, जिससे परिवहन लागत बढ़ेगी और देश में आवश्यक वस्तुओं की महंगाई (Higher Inflation) बेकाबू हो सकती है।
भारतीय अर्थव्यवस्था और ब्याज दरों पर दबाव
कच्चे तेल के अलावा, इस युद्ध के कारण भारतीय निर्यातकों को भी यूरोप और पश्चिमी देशों में अपना माल भेजने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि आयात महंगा हुआ और महंगाई बढ़ी, तो भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) को भी अपनी मौद्रिक नीति में बदलाव करना पड़ सकता है। इससे ब्याज दरों (Interest Rates) में कटौती टल सकती है, जिसका सीधा असर आम आदमी के होम लोन और ईएमआई (EMI) पर पड़ेगा।
