बिहार की राजनीति में एक बार फिर से भारी हलचल देखने को मिल रही है। आगामी राज्यसभा चुनावों के लिए पार्टी उम्मीदवारों की घोषणा के बाद सत्ताधारी जनता दल यूनाइटेड (JDU) के भीतर असंतोष के सुर तेजी से उठने लगे हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की इसी नाराजगी को दूर करने और स्थिति को तुरंत संभालने के लिए मुख्यमंत्री ‘Nitish Kumar calls JDU meeting’ (नीतीश कुमार ने जेडीयू की बैठक बुलाई है), जिसने पटना के राजनीतिक गलियारों में सरगर्मी बढ़ा दी है।
बगावत के सुर और Nitish Kumar calls JDU meeting
पटना स्थित मुख्यमंत्री आवास पर बुलाई गई इस आपात और अहम बैठक में पार्टी के सभी प्रमुख नेताओं, विधायकों और सांसदों को अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया है। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, राज्यसभा चुनाव के लिए हाल ही में घोषित किए गए उम्मीदवारों के नामों से जेडीयू का एक बड़ा धड़ा अंदरूनी तौर पर नाखुश है। इसी संभावित बगावत को शांत करने के लिए पार्टी सुप्रीमो नीतीश कुमार ने खुद मोर्चा संभाल लिया है।
राज्यसभा टिकट बंटवारे से भारी नाराजगी
पार्टी के अंदर यह असंतोष मुख्य रूप से टिकट बंटवारे में कुछ पुराने और कद्दावर नेताओं की कथित अनदेखी किए जाने के कारण पनपा है। कई वफादार नेताओं को उम्मीद थी कि इस बार उन्हें उच्च सदन (Rajya Sabha) में भेजा जाएगा। लेकिन सूची जारी होने के बाद समीकरण कुछ और ही नजर आए। इस फैसले से निराश नेताओं ने दबी जुबान में संगठन के भीतर अपनी कड़ी नाराजगी जाहिर करना शुरू कर दिया है।
डैमेज कंट्रोल और चुनाव की रणनीति
इस हाई-प्रोफाइल बैठक का मुख्य एजेंडा स्पष्ट रूप से ‘डैमेज कंट्रोल’ (Damage Control) है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपने नाराज विधायकों और पदाधिकारियों से सीधा संवाद स्थापित कर उनकी शिकायतों को सुनेंगे और उन्हें मनाएंगे। भविष्य के चुनावों को देखते हुए जेडीयू का शीर्ष नेतृत्व किसी भी प्रकार की आंतरिक गुटबाजी का जोखिम नहीं लेना चाहता है। माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री अपने लंबे राजनीतिक अनुभव के जरिए इस कलह को जल्द ही सुलझा लेंगे।
