छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) और रायपुर शहर जिला कांग्रेस के बीच संगठनात्मक नियुक्तियों को लेकर चल रहा विवाद अब खुलकर सामने आ गया है। रायपुर शहर जिला कांग्रेस द्वारा जारी की गई 70 वार्ड अध्यक्षों की सूची को पीसीसी द्वारा चंद घंटों के भीतर ही निरस्त कर दिया गया था। अब इस फैसले के विरोध में पार्टी के भीतर इस्तीफों का दौर शुरू हो गया है, जिससे गुटबाजी और अंदरूनी कलह स्पष्ट रूप से उजागर हो रही है।
35 साल पुराने नेता का इस्तीफा और सूची का विवाद
प्रदेश नेतृत्व के इस ‘निरस्त आदेश’ से नाराज होकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिनेश ठाकुर ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। दिनेश ठाकुर पिछले 35 वर्षों से कांग्रेस से जुड़े हुए थे।
इस विवादित सूची से जुड़े कुछ अहम तथ्य इस प्रकार हैं:
- यह सूची पूर्व विधायक अरुण वोरा और शहर जिला अध्यक्ष श्रीकुमार मेनन द्वारा तैयार की गई थी।
- कुल 70 वार्डों के लिए जारी इस सूची में 13 वार्ड ऐसे थे, जहां ‘दो अध्यक्ष’ की व्यवस्था लागू की गई थी। इसके पीछे तर्क दिया गया था कि ये वार्ड काफी बड़े और विस्तारित हैं।
- रात 9 बजे यह सूची सार्वजनिक की गई, लेकिन इस पर तुरंत बवाल मच गया और प्रदेश महामंत्री मलकीत सिंह गैदू ने बिना पीसीसी की अनुमति के सूची जारी होने का हवाला देते हुए इसे निरस्त कर दिया।
पीसीसी चीफ का बयान: “प्रक्रिया का पालन जरूरी”
इस पूरे घटनाक्रम पर बस्तर प्रवास पर मौजूद पीसीसी चीफ दीपक बैज ने स्पष्ट किया है कि संगठन में हर नियुक्ति की एक तय प्रक्रिया होती है। उन्होंने कहा, “पहले गठन होता है, फिर नियुक्ति सूची जारी करने के लिए उसे पीसीसी, प्रभारी महामंत्री और छत्तीसगढ़ इंचार्ज को भेजना होता है। इस प्रक्रिया से सभी को गुजरना पड़ेगा।”
वहीं, दूसरी ओर रायपुर कांग्रेस जिला अध्यक्ष श्रीकुमार मेनन लगातार इस बात से इनकार कर रहे हैं कि संगठन में कोई टकराव है। उन्होंने कहा कि वे दीपक बैज और अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों से चर्चा करेंगे और आपसी बातचीत से सारे मुद्दे सुलझा लिए जाएंगे।
भाजपा का तंज: “संगठन में शक्ति बंटवारे को लेकर झगड़ा”
कांग्रेस की इस अंदरूनी कलह पर मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने तीखा प्रहार किया है। प्रदेश भाजपा के प्रवक्ता दाऊ अनुराग अग्रवाल ने एक वीडियो बयान जारी करते हुए कांग्रेस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “जब कांग्रेस सत्ता में थी, तब उनके नेता भ्रष्टाचार के बंटवारे को लेकर लड़ते थे। अब जब वे विपक्ष में हैं, तो संगठन में शक्ति के बंटवारे के लिए झगड़ रहे हैं। झगड़ा करना अब कांग्रेस की संस्कृति नहीं, बल्कि उनका हक बनता जा रहा है। वे भाजपा के संगठनात्मक ढांचे की नकल तो कर सकते हैं, लेकिन हमारे जैसी सेवा, समर्पण और अनुशासन कभी नहीं ला सकते।”
कुल मिलाकर, Raipur Congress Ward President की इस सूची ने प्रदेश कांग्रेस के भीतर नेतृत्व और समन्वय के गंभीर संकट को उजागर कर दिया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पार्टी आलाकमान इस डैमेज कंट्रोल को कैसे संभालता है।
